Supreme Court on Hate Speech: सुप्रीम कोर्ट ने आज 17 फरवरी मंगलवार को नेताओं के भाषणों को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। इसे लेकर कोर्ट ने शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा समेत 12 याचिकाकर्ताओं से राजनीतिक भाषणों पर दिशानिर्देश के लिए एक नई याचिका दाखिल करने के लिए कहा है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि याचिका में नेताओं और मीडिया के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि कुछ नेताओं के भाषण भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को प्रभावित करते हैं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश का माहौल जहरीला होता जा रहा है।
बता दें कि यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कथित हेट स्पीच के संदर्भ में दायर की गई थी। सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि 'किसी एक नेता के खिलाफ राहत नहीं मांगी जा रही है, बल्कि भाषणों में जवाबदेही तय करने के लिए गाइडलाइन बनाने का अनुरोध किया गया है।' लेकिन बेंच सिब्बल की दलील से सहमत नहीं हुई
चीफ जस्टिस ने क्या टिप्पणी की ?
चीफ जस्टिस सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका केवल एक खास राजनीतिक दल के कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के खिलाफ दिखती है। उन्होंने कहा, 'इसे वापस लें। एक सीधी-सादी याचिका दायर करें जिसमें यह बताया जाए कि राजनीतिक दल कैसे नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।" कोर्ट ने यह भी कहा कि वह एक निष्पक्ष याचिका पर सुनवाई के लिए उत्सुक है।
जस्टिस नागरत्ना ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की, 'राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर हम गाइडलाइन बना भी दें, तो उनका पालन कौन करेगा? उन्होंने कहा, 'भाषण की उत्पत्ति विचारों से होती है। आप विचारों को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं? हमें संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप विचारों को बढ़ावा देना होगा।'
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चुनाव आचार संहिता का जिक्र
कपिल सिब्बल ने चुनाव आचार संहिता के बारे में भी सुनवाई के दौरान जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होती है, लेकिन उससे पहले दिए गए भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि, 'ऐसे मामलों में मीडिया की क्या जिम्मेदारी होती है, ताकि लोकतांत्रिक माहौल खराब न हो?'
जस्टिस बागची ने सुनवाई में कहा कि कोर्ट केवल आदेश पारित कर सकता है, लेकिन उन्हें लागू करना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई सिद्धांत तय कर चुका है, लेकिन इसमें राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि नेता पार्टी का ही सदस्य होता है।
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