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दक्षिण पीठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु नरेन्द्राचार्य  महाराज मंगलवार को अंबागढ़ चौकी का क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे। उनकी उपस्थिति में गुरु दीक्षा लेकर 200 परिवार सनातनी परंपरा में लौटे। 

एनिशपुरी गोस्वामी- मोहला। दक्षिण पीठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु नरेन्द्राचार्य महाराज के आगमन से अंबागढ़ चौकी का क्रिकेट स्टेडियम भक्तिमय हो गया। जिले के इतिहास में पहली बार आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में धर्म आचार्य ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए हिंदू एकता का मंत्र दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए सभी हिंदुओं का एकजुट होना परम आवश्यक है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'समस्या मार्गदर्शन' सत्र रहा, जहां हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर जगतगुरु के दर्शन किए और अपनी समस्याओं का निवारण पाया। स्वामी जी ने लोगों को आध्यात्मिक उपायों के साथ जीवन जीने की सही राह दिखाई। 

​200 लोगों ने अपनाया सनातन धर्म
इस धार्मिक समागम में मोहला- मानपुर, अंबागढ़- चौकी जिले के 200 लोगों ने स्वेच्छा से 'घर वापसी' की। जगतगुरु नरेन्द्राचार्य जी ने इन सभी को गुरु दीक्षा देकर आशीर्वाद दिया और गले लगाया। दीक्षा प्राप्त करने वालों ने संकल्प लिया कि वे अब आजीवन सनातन धर्म के नियमों का पालन करेंगे। 

धर्म रक्षक की भूमिका में दिखीं रेणु टांडिया
इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता में जनपद सदस्य मानपुर, रेणु टांडिया और उमाकांत टांडिया की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने धर्म जागरण की मिसाल पेश करते हुए सुदूर वनांचल क्षेत्रों से 100 ऐसे लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने का कार्य किया, जो किन्हीं कारणों से धर्म से विमुख हो गए थे। दूसरे धर्म को अपना लिए थे रेणु टांडिया स्वयं इन सभी को लेकर दीक्षा स्थल तक पहुंचीं। विशेष रूप अतिथि के रूप में सच्चिदानंद उपासने प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, संजीव शाह उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन की सराहना की। 

200 people returned to the Sanatan tradition
200 लोगों ने सनातन परंपरा में की वापसी 

जगद्गुरु ने सामाजिक समरसता को बढ़ाने का किया आह्वान 
जगद्गुरु श्री ने अपने संदेश में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अध्यात्म और विज्ञान का संतुलन बनाए रखना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मन को संयमित कर सत्कर्म के मार्ग पर चले तो उसका जीवन सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि, तुम जियो और दूसरों को जीवन दो के संदेश को पुनः दोहराते हुए समाज में प्रेम, समरसता और सेवा की भावना को बढ़ाने का आह्वान किया।

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