Logo
तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद राजपाल यादव ने पहला बयान जारी कर देश और बॉलीवुड इंडस्ट्री का समर्थन देने के लिए धन्यवाद जताया। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिली है।

Rajpal Yadav: 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिली जिसके बाद 17 फरवरी को वह तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपना बयान जारी किया है। दिल्ली हाई कोर्ट से 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्होंने देशभर के प्रशंसकों और बॉलीवुड इंडस्ट्री का समर्थन देने के लिए आभार जताया।

रिहाई के बाद क्या बोले राजपाल यादव?

न्यूज एजेंसी ANI द्वारा साझा किए गए वीडियो में राजपाल यादव वकीलों से घिरे नजर आए। उन्होंने कहा, "मैं 2027 में मुंबई में बॉलीवुड में अपने 30 साल पूरे करूंगा। देशभर से, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सबका प्यार मुझे मिला है। पूरे देश, दुनिया और मेरे बॉलीवुड ने जिस तरह मुझे प्यार दिया है, उसके लिए मैं आभारी हूं। अगर मुझ पर कोई आरोप हैं, तो मैं जवाब देने के लिए उपलब्ध हूं। हाई कोर्ट का धन्यवाद।"

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं, जिसमें वह पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

कोर्ट ने किन शर्तों पर दी राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी सजा पर 18 मार्च तक रोक लगाते हुए अंतरिम जमानत दी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और एक जमानती की शर्त पर जमानत मंजूर की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले 1.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता कंपनी एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से यह पुष्टि किए जाने के बाद कि राशि कंपनी के खाते में जमा कर दी गई है, जमानत दे दी गई। अगली सुनवाई तक राजपाल यादव को जेल से बाहर रहने की अनुमति है, लेकिन इस दौरान उन्हें बकाया रकम का शेष भुगतान करना होगा।

Rajpal Yadav out of jail
राजपाल यादव | Instagram

फिल्म फ्लॉप और कर्ज में डूबे राजपाल

मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। 2012 में फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बाद कर्ज चुकाने में दिक्कतें आईं और विवाद कानूनी लड़ाई में बदल गया।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सात चेक बाउंस होने के बाद उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी। 2019 में सत्र अदालत ने भी इस सजा को बरकरार रखा।

अक्टूबर 2025 तक राजपाल ने 75 लाख रुपये दो डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया राशि का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है।

5379487