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रायपुर जिले के आंबेडकर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चाकू के हमले में घायल युवक का हाथ बचाया। कंधे की हड्डी काटकर कृत्रिम नस लगाई।

रायपुर। रायपुर जिले में आटो चालक के चाकू के हमले से गंभीर रूप से घायल मरीज का हाथ डाक्टरों की सजगता से बचा लिया गया। कंधे की हड्डी काटकर क्षतिग्रस्त स्थान पर कृत्रिम नस लगाकर युवक को अपंग होने से बचा लिया गया। बेहोशी की हालत में लाए गए मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद परिजन रेफर करवाकर ले गए थे, मगर निजी अस्पतालों की मनाही के बाद उसे पुनः आंबेडकर अस्पताल लाकर ऑपरेशन कराया।

इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए हृदय रोग के साथ हड्डी रोग विभाग के सर्जनों ने संयुक्त रूप से मेहनत की। चिकित्सकों के मुताबिक अमलेश्वर में रहने वाले 34 साल के युवक को बेसुध अवस्था में ट्रामा में लाया गया था। उसे कंधे पर चाकू से वार किया गया था, जहां से लगातार खून बह रहा था। प्राथमिक उपचार के बाद रक्तप्रवाह तो रुक गया था, मगर हाथ काला पड़ने लगा था और उसकी ताकत खत्म होने लगी थी। 

पहले कॉलर बोन को काटकर रास्ता बनाया
इमरजेंसी के डाक्टरों ने शीघ्र ऑपरेशन की जरूरत बताई थी। परिवार वाले उसे अपनी जिम्मेदारी में निजी अस्पताल ले गए थे, मगर वहां युवक का ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया। इसके बाद मरीज को वापस आंबेडकर अस्पताल लाया गया। यहां हार्ट चेस्ट एंड वैस्कुलर विभाग और हड्डी रोग विभाग के डाक्टरों ने मिलकर मरीज का ऑपरेशन पूरा किया। चाकू के हमले में कटी सबक्लेवियन नामक नस को जोड़ने के लिए कृत्रिम नस की मदद ली गई। क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचने के इसके पहले कॉलर बोन को काटकर रास्ता बनाया गया। 

ऑपरेशन में ये रहे शामिल
इस जटिल ऑपरेशन को पूरा करने वालों में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय। श्रीवास्तव, डॉ लोमेश साहू, एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर आयुषी खरे, ख्याति,, आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, ओमप्रकाश शामिल रहे।

चार घंटे की सर्जरी, लगा 5 यूनिट ब्लड
डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7 इनटू 30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान बैकियल प्लेक्सस को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवा की आशंका रहती है। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में लौट चुका है।

गाड़ी टकराने पर हुआ था झगड़ा
परिजनों ने सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डा. कृष्णकांत साहू को बताया था कि युवक परिवार के साथ बाइक में रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था। इसी दौरान एक इलेक्ट्रानिक आटो से उसकी गाड़ी टकरा गई थी। इस पर विवाद बढ़ा और आटो चालक ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। चाकू का वार बाएं कंधे पर लगा जो इतना गहरा था कि हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चाकू लगते ही खून का फौवारा छूटा और युवक बेसुध होकर गिर पड़ा था।


 

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