इंदौर। आम लोगों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया अब और ज्यादा आसान और तेज होने जा रही है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फैसला किया है कि वे सप्ताह में दो दिन-संकल्प से समाधान जनता चौपाल-का आयोजन करेंगे। चौपाल में स्थानीय नागरिकों की शिकायतें सीधे सुनी जाएंगी और उनका मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह पहल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे संकल्प से समाधान कार्यक्रम की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
महापौर भार्गव ने बताया कि जनता चौपाल की शुरुआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से की जाएगी। दीनदयाल उपाध्याय का विचार था कि विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। इसी अंत्योदय के आदर्श को आधार बनाकर यह योजना तैयार की गई है, ताकि हर वार्ड के नागरिकों की समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचें और उनका समाधान बिना देरी के हो सके। जनता चौपाल हर सप्ताह दो अलग-अलग वार्डों में आयोजित की जाएगी। इस दौरान महापौर के साथ संबंधित क्षेत्र के पार्षद, जोन अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य और निगम के सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
भार्गव ने बताया कि चौपाल की शुरुआत सुबह 8 बजे से होगी। सबसे पहले क्षेत्र के प्रमुख स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि जमीनी हालात को समझा जा सके। इसके बाद जनसंवाद के जरिए लोगों से बातचीत की जाएगी और फिर चौपाल में बैठकर उनकी शिकायतें दर्ज की जाएंगी। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कई समस्याओं का तुरंत समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे। जिन मामलों में समय लगने वाला होगा, उनमें संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। जनता चौपाल में निगम के लगभग 12 विभागों के अधिकारी और विभागाध्यक्ष शामिल रहेंगे।
भार्गव ने कहा जनता चौपाल में सभी अधिकारियों के होने से फैसले लेने में देरी नहीं होगी और लोगों को तुरंत न्याय मिल सकेगा। जनता चौपाल की पहल से नागरिकों को अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि प्रशासन खुद उनके द्वार पर पहुंचकर उन्हें न्याय उपलब्ध कराएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि जनता की परेशानियों को समझने का सबसे बेहतर तरीका है, सीधे उनके बीच जाकर उनकी बात सुनना। उन्होंने कहा कि संकल्प से समाधान जनता चौपाल के माध्यम से हर वार्ड की समस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
एपी सिंह की रिपोर्ट-











