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Cheteshwar Pujara on Team India Comeback: चेतेश्वर पुजारा भले ही अभी टीम इंडिया से बाहर चल रहे लेकिन उनका मानना है कि अभी भी उनके अंदर काफी क्रिकेट बची हुई है। उन्होंने अपनी उम्र को लेकर उठ रहे सवालों पर जेम्स एंडरसन और नोवाक जोकोविच का उदाहरण दिया है।

नई दिल्ली। टीम इंडिया से बाहर चल रहे चेतेश्वर पुजारा ने साफ कर दिया है कि उन्होंने अभी कमबैक की उम्मीद नहीं छोड़ी है और उनके अंदर अभी काफी क्रिकेट बची है। पुजारा ने कहा कि उम्र सिर्फ एक आंकड़ा भर है। जब 41 साल के जेम्स एंडरसन और 35 साल के नोवाक जोकोविच खेल सकते हैं तो फिर वो क्यों नहीं। पुजारा ने कहा कि रणजी ट्रॉफी में भी रन बनाना आसान नहीं हैं और वो जितना लंबा हो सकेगा खेलेंगे। 

चेतेश्वर पुजारा पिछले करीब 1 साल से भारतीय टेस्ट टीम से बाहर चल रहे। वो पिछली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत की तरफ से टेस्ट खेले थे। इसके बाद उन्हें खराब फॉर्म की वजह से टीम से बाहर कर दिया गया था। लेकिन, रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में उनके बल्ले से रन बरस रहे हैं। वो अबतक 6 मैच में 74.77 की औसत से 673 रन बना चुके हैं। उन्होंने 2 शतक और दो अर्धशतक ठोके हैं। वो रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के जरिए टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद कर रहे। 

उम्र मेरे लिए एक आंकड़ा भर: पुजारा
पुजारा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में अपनी वापसी, भारत की तरफ से खेलने के जुनून के अलावा तमाम मुद्दों पर बात की। पुजारा से जब ये सवाल पूछा गया कि क्या वो लंबे वक्त तक खेलेंगे तो उन्होंने कहा, "मैं वास्तव में महसूस करता हूं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है (वह अभी 36 वर्ष के हुए हैं)। आपके पास जेम्स एंडरसन का उदाहरण है जो 41 साल की उम्र में तेज गेंदबाजी कर रहे हैं और अभी भी इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज हैं। नोवाक जोकोविच ने हाल ही में कहा था कि 35 नया 25 है। खेल की गतिशीलता बदल रही है और खिलाड़ी फिट हो रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उम्र अब कोई बाधा है। विशेष रूप से उन खिलाड़ियों के लिए जो केवल एक ही फॉर्मेट में खेलते हैं, इससे मुझे काफी मदद मिली है। अगर मैं केवल टेस्ट खेल रहा हूं तो मैं अपने शरीर को बेहतर बनाए रख सकता हूं। आपको बस फिटनेस पर काम करते रहना है।"

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'रणजी ट्रॉफी में रन बनाना आसान नहीं'
पुजारा ने रणजी ट्रॉफी के अपने हालिया फॉर्म को लेकर कहा, " जिस तरह से मैं बैटिंग कर रहा हूं और अपनी फिटनेस पर काम कर रहा हूं। मुझे अपने ऊपर पूरा भरोसा है। रणजी ट्रॉफी में रन बनाना इतना भी आसान नहीं होता है। रणजी ट्रॉफी में डीआरएस नहीं होता है और कई बार अंपायर का फैसला आपके खिलाफ भी चला जाता है। अगर आपको रन बनाने हैं तो फिर कड़ी मशक्कत करनी होगी और अपने खेल को शीर्ष पर लेकर जाना ही होगा। उम्मीद है कि जिस स्तर पर भी मुझे खेलने का मौका मिलेगा, मैं उसमें अपना योगदान देने में सक्षम रहूंगा।"

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