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जम्मू-कश्मीर के नए उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकारों को लेकर नहीं हुआ फैसला

जम्मू-कश्मीर में नए उपराज्यपाल के रूप में मनोज सिन्हा के शपथ के बाद क्या सभी सलाहकारों को छुट्टी कर दी जाएगी? या कुछ सलाहाकर उपराज्यपाल के साथ अटैच किए जाएंगे? इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

जम्मू-कश्मीर के नए उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकारों को लेकर नहीं हुआ फैसला
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मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में नए उपराज्यपाल के रूप में मनोज सिन्हा के शपथ के बाद क्या सभी सलाहकारों को छुट्टी कर दी जाएगी? या कुछ सलाहाकर उपराज्यपाल के साथ अटैच किए जाएंगे? इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मगर, निवर्तमान उपराज्यपाल के जीसी मुर्मु की मदद के लिए केंद्र सरकार ने चार सलाहकारों की नियुक्ति तत्काल कर दी थी। जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार की कोशिश है कि राजनीतिक गतिविधियां बहाल किया जाए।

सूबे में विधानसभा चुनाव कराने का विमर्श शुरू हो चुका है। तभी गुजरात काडर के आईएएस अधिकारी रहे उपराज्यपाल मुर्मु को सीएजी का प्रभार देकर मनोज सिन्हा के रूप में एक खालिस राजनेता को उपराज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है। उपराज्यपाल जब मुर्मु थे तब पूर्व आईएएस किशोर शर्मा और बशीर अहमद खान के साथ पूर्व आईपीएस राजीव राय भटनागर और फारुख खान के साथ बतौर सलाहकार अटैच किया गया था।

जब कि मुर्मु खुद 1985 बैच के आईएएस थे। सभी सलाहकारों की नियुक्ति उपराज्यपाल के साथ ही 'कोटर्मिनस' विधि से थी। यानि उपराज्यपाल के पद से मुर्मु ने इस्तीफा दे दिया तो सभी चारों सलाहकारों की नियुक्ति भी खत्म हो गई। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो सूबे बनने और धारा 370 के हटने के समय 5 अगसत 2019 को आईपीएस भटनागर घाटी में सीआरपीएफ की नियुक्ति की कमान संभाले थे।

जबकि आईएएस अहमद कश्मीर के डिवीजनल कमीश्नर थे। घाटी की रग-रग से वाकिफ थे। सो, वे बेहतर स्थिति में उपराज्यपाल के उचित सलाह देने की स्थिति में थे। घाटी के सभी 10 जिलों में भटनागर ने स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पशु पालन की जिम्मेदारी अलग से देख रहे थे। जब कि खान के पास पॉवर, ग्रामीण विकास और पंचायती राज, आपदा, पर्यटन और फ्लोरीकल्चर का काम था।

दोनों को रिटायरमेंट के बाद उनके अनुभवों को देखते हुए उपराज्यपाल के सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया था। जब कि शर्मा और खान, मुर्मु से पहले रहे राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे जब 2018 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस समय राज्यपाल के साथ पांच सलाहकार लगाए गए थे। आईपीएस के. विजय कुमार, आईएएस के. स्कंदन और खुर्शीद अहमद गनई, तीनों राज्यपाल सत्यपाल मलिक के जाने के बाद राज्यपाल भवन से चले गए।

क्या दिया जाएगा फ्री हैंड

यही वजह है कि नए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नियुक्ति के बाद दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक ये बात सरगर्म हैं कि उपराज्यपाल के साथ नए सलाहकारों की नियुक्ति होगी, या मनोज सिन्हा को नए सिरे से लोकतांत्रिक गतिविधियों को गति देने के लिए फ्री-हैंड दिया जाएगा!

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