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आईआईटी मद्रास के छात्रों ने बनाया सॉफ्टवेयर, ड्रोन से बचाई जा सकेगी प्राकृतिक आपदा में फंसे लोगों की जान

आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के छात्रों ने एक सॉफ्टवेयर (Software) तैयार किया है। जिसमें ड्रोन (Drone) के जरिए प्राकृतिक आपदा (Natural Disasters) से ग्रसित इलाके का वीडियो बनाया जाएगा। जिसे सॉफ्टवेयर स्कैन कर इलाकों में फंसे लोगों की जानकारी मिलेगी।

आईआईटी मद्रास के छात्रों ने बनाया साफ्टवेयर, ड्रोन के जरिए बचाई जा सकेगी प्राकृतिक आपदाओं में फंसे लोगों की जानIIT Madras students make software, people can be saved in natural disasters through drones

प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) की चपेट में आकर लाखों लोगों की जाने चली जाती हैं। जिन्हें बचाना संभव नहीं हो पाता है। लेकिन हजारों लोग ऐसे भी होते हैं जो इन आपदाओं की बीत जाने के बाद भी कई दिनों तक फंसे रहते हैं। लेकिन उनके बारे में पता नहीं लग पाने के कारण उन्हें भी जान गवानी पड़ती है। आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के छात्रों ने ऐसे लोगों की जान बचने के लिए एक सॉफ्टवेयर (Software) बनाया है।

इस सॉफ्टवेयर के जरिए बाढ़, भूकंप, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान फंसे जीवित लोगों का पता लगाया जा सकेगा। आईआईटी मद्रास के छात्रों की एक टीम ने प्रोजेक्ट 'आई इन द स्काई' (Eye In The Sky) के तहत इस सॉफ्टवेयर को तैयार किया है। प्रोजेक्ट टीम का नेतृत्व प्रोफेसर शंकर और छात्र आयुष पारसभाई ने किया है। इनसे मिली जानकारी के अनुसार इस सॉफ्टवेयर से नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) को काफी मदद मिलेगी। ऐसी स्थिति में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरा को भेजा जाएगा। जो कि प्राकृतिक आपदा वाले इलाकों की ऑनलाइन और ऑफ लाइन वीडियो बनाएगा। ड्रोन के जरिए बनाई गई वीडियो को सर्वस पर अपलोड किया जाएगा। सर्वर में मौजूद यह सॉफ्टवेयर अपलोड की गई वीडियो का विश्लेषण करेगा और किसी भी लेटे हुए या हलचल करने वाले इन्सान का पता लगा लेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि अगर ड्रोन जहां उड़ रहा है उस जगह इंटरनेट उपलब्ध हुआ तो आपदा में फंसे लोगों की जानकारी तुरंत प्राप्त हो जाएगी। लेकिन अगर उस जगह पर इंटरनेट नहीं होगा तो उस वीडियो को किसी इंटरनेट वाले क्षेत्र में लाकर सॉफ्टवेयर से विश्लेषण किया जा सकता है। आयुष का कहना था कि एनडीआरएफ के जरिए मिली जानकारी के अनुसार आपदाओं के समय अधिकतर लोग घर की छतों पर या खुली या ऊचाई वाली जगहों पर आ जाते हैं। इसी आधार पर इस साफ्टवेयर को तैयार किया गया है। साफ्टवेयर करीब ड्रोन द्वारा सौ मीटर की ऊंचाई से बनाए हुए वीडियो का अच्छी तरह से विश्लेषण कर सकता है। यह साफ्टवेयर स्मार्टफोन से बनाए गए वीडियो का विश्लेषण करने में भी सक्षम है। अगर कोई भी व्यक्ति करीब सौ मीटर ऊंचे किसी पहाड़ या टॉवर से कोई वीडियो बनाकर एप पर अपलोड करेगा तो क्लाउड सॉफ्टवेयर बता देगा कि उस जगह पर कितने लोग फंसे हुए हैं।

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