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चंद्रयान 2: जानें क्या होती है हार्ड लैंडिंग

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) लैंडर विक्रम (Lander Vikram) की मदद करने में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) भी इसरो (ISRO) की सहायता करने में लगी हुए है। नासा ने अपने लूनर रीकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) में लगे कैमरे से लैंडिंग वाली जगह की नई तस्वीरों जारी कर दी हैं। नासा ने इस बात की पुष्टि की है कि विक्रम ने चंंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग (Hard Landing) की थी।

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चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम (Vikram Lander) से संपर्क टूट जाने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष ऐजंसी नासा (NASA) भी चंद्रयान को ढूंढने में भारत की मदद कर रही थी। शुक्रवार को नासा ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन की तस्वारें जारी की हैं जिन्हें नासा लूनर रीकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) में लगे कैमरे के द्वारा कैप्चर किया गया था। अभी कर विक्रम का पता नहीं चल पाया है लेकिन नासा ने पुष्टि की है कि विक्रम ने चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग (Hard Landing) की है।

जानें क्या होती है हार्ड लैंडिंग

किसी भी अंतरिक्षयान या वायुविमान की हार्ड लैंडिंग तब होती है जब वह सामान्य की तुलना में अत्यधिक तेज गति व ताकत के साथ लंबवत्त स्थिति में सतह पर जाकर टकराता है। लैंडिग यान के उड़ने की प्रक्रिया में अंतिम चरण होता है, जब विमान उड़ान भरने के बाद वापस सतह पर उतर रहा होता है।

लैंडिंग के दौरान विमान की औसत लंबवत्त गति 2 मीटर प्रति सेकेंड होती है। इससे ज्यादा लंबवत्त गति पर अगर लैंडिंग होती है तो उसे हार्ड लैंडिंग कहा जाता है। हार्ड लैंडिंग को तय करने मे चालक समूह का फैसला सबसे विश्वसनीय होता है। त्वरण की वैल्यू सही दर्ज की गई हो तभी हार्ड लैंडिंग का पता चल सकता है।


लेकिन ऐक्सिलिरेशन की वैल्यू दर्ज नहीं हो पाने की वजह से चालक दल ही हार्ड लैंडिग का अनुमान लगाने के लिए सबसे विश्वसनीय सूत्र है, क्योंकि लैंडिंग के समय ऐक्सिलिरेशन कितना था इसका सबसे सही अनुमान चालक को ही होता है।

हार्ड लैंडिंग के कारण

हार्ड लैंडिग कई कारणों की वजह से हो सकती है। जैसे कि खराब मौसम, यांत्रिक खराबी, विमान में वजन का ज्यादा हो जाना, चालक की गलती आदि। अगर चाल पूरी तरह विमान से नियंत्रण खो देता है तो विमान क्रैश हो जाता है जब्कि हार्ड लैंडिंग में यह माना जाता है कि चालक का विमान पर नियंत्रण थोड़ा या पूरी तरह होता है।

हार्ड लैंडिंग से होने वाली हानी इस बात पर निर्भर करती है कि कितने ऐक्सिलिरेशन के साथ विमान सतह पर उतरा है। उस समय जितना ज्यादा ऐक्सिलिरेशन होता है, विमान में उतना ज्यादा ही नुकसान होता है।

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