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Pandurang Shastri Athavale : आध्‍यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री आठवले ने रखी थी स्वाध्याय की नींव, जानिए खास बातें

Birthday Special/एक दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक पांडुरंग शास्त्री आठवले की 99वीं जयंती शनिवार 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। उन्होंने स्वाध्याय परिवार की नींव रखी और लोगों को इसकी तरफ प्रेरित किया।

Birthday Special: आज ही के दिन हुआ था आध्‍यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री आठवले का जन्‍म, इस वजह से किया जाता है यादBirthday Special who is Pandurang Shastri Athawale

Birthday Special/एक दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक पांडुरंग शास्त्री आठवले (Pandurang Shastri Athawale) की 99वीं जयंती (Birth Anniversary) शनिवार 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। वैसे उन्हें प्यार से दादाजी बुलाया जाता था। जिसे मराठी में बड़े भाई का दर्जा दिया गया है।

पांडुरंग शास्त्री आठवले ने स्वाध्याय आंदोलन के परिवार की स्थापना की और उसके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। स्वाध्याय काअर्थ होता है 'स्वयं का अध्ययन करना', जो हमें आध्यात्म की तरफ ले जाता है।

पांडुरंग शास्त्री आठवले की जीनव परिचय

आठवले का जन्म 19 अक्टूबर 1920 और निधन 25 अक्टूबर 2003 को हुआ। उनका जन्म महाराष्ट्र के रोहा गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता शास्त्री संस्कृत शिक्षक थे और मां गृहण थी। बचपन से ही उन्हें संस्कृत और दुसरे हिन्दू ग्रंथों को पढ़ने की रूचि रही। सिर्फ 22 साल की उम्र में ही उन्होंने श्रीमद भगवद गीता पाठशाला में प्रवचन देने शुरू कर दिया था, जो उनके पिता द्वारा स्थापित किया गया।

स्वाध्याय आंदोलन की शुरुआत

स्वाध्याय आंदोलन श्रीमद् भगवद् गीता पर आधारित आत्म-ज्ञान का आंदोलन रहा है। यह आंदोलन भारत के लाखों गांवों तक पहुंचाया गया। उन्होंने गीता एवं उपनिषदों पर अपने प्रवचन दिए जो काफी प्रसिद्ध रहे। जिनकी वजह से उन्हें आज भी याद किया जाता है। उन्होंने अध्यात्म समाज की तरफ लोगों को ध्यान खिंचा।

स्वाध्याय परिवार का निर्माण किया

उनके जन्मदिन को हर साल 'मनुष्य गौरव दिन' के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने साहित्य, वेदांत और न्याय का अध्ययन किया। कहते हैं कि पांडुरंग शास्त्री ने अखंड वैदिक धर्म, जीवन जीने का तरीका, पूजा का तरीका और पवित्र मंच से सोचने का तरीका लोगों को दिया। जिसके आधार पर स्वाध्याय परिवार का निर्माण हुआ।

कई अवॉर्डों से हो चुके हैं सम्मानित

इस क्षेत्र में अहम योगदान देने के लिए उन्हें 1997 में टेंपल्टन अवॉर्ड और साल 1999 में मैगससे अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पद्मविभूषण भी मिल चुका है।

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