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Rajnath Singh on Congress extinction like dinosaurs:रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अगले कुछ साल में कांग्रेस डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाएगी। इसके साथ ही राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पार्टी की तुलना रियलिटी शो बिग बॉस के साथ भी की।

Rajnath Singh on Congress extinction like dinosaurs:रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को उत्तराखंड के पौड़ी में रैली को संबोधित किया। मंच से उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगले कुछ साल में कांग्रेस डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाएगी। इसके साथ ही राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पार्टी की तुलना रियलिटी शो बिग बॉस के साथ भी की। रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेता रोज एक दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं। यही हाल रहा तो 2024 के लोकसभा चुनाव के कुछ साल के बाद बच्चे भी इस पार्टी को नहीं पहचानेंगे।

कांग्रेस के कई नेताओं ने छोड़ी है पार्टी
बता दें कि बीते कुछ कुछ महीनों में कांग्रेस के नेताओं के पार्टी छोड़ी है और एनडीए में शामिल हो गए हैं। राजनाथ सिंह का इशारा इसी ओर था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे मिलिंदा देवड़ा और अशोक चव्हाण ने भी पार्टी को अलविदा कहा है। मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस छोड़कर शिवसेना (यूबीटी) का दामन थाम लिया है। वहीं अशोक चव्हाण बीजेपी में शामिल हुए हैं। चव्हाण को बीजेपी ने राज्यसभा सांसद बना दिया है।

बीजेपी कैंडिडेट के समर्थन में की रैली
रक्षा मंत्री ने रैली में कहा कि कांग्रेस से नेताओं के पलायन का सिलसिला जारी है। एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हैं। पार्टी के नेता आपस में झगड़ रहे हैं। यह पार्टी कुछ हद तक बिग बॉस के घर की तरह हो गई है। ऐसा रहा तो कुछ साल में कांग्रेस डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाएगी। उत्तराखंड के पौड़ी से बीजेपी उम्मीदवार अनिल बलूनी के समर्थन में रैली के दौरान रक्षा मंत्री ने यह बात कही। 

केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कही ये बात
एक दिन पहले ही राजनाथ सिंह ने लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर लग रहे आरोपों पर भी जवाब दिया था। राजनाथ सिंह ने कहा था कि केंद्र पर सरकारी एजेंसियों के दुरपयोग का आरोप लगाना गलत है। अगर यह मान लें कि अरविंद केजरीवाल हमारे कारण जेल गए, तो उन्हें कोर्ट से राहत क्यों नहीं मिल पा रही है? क्या हमने देश की अदालतों पर भी नियंत्रण कर लिया है‍? पता नहीं यह लोग कहना क्या चाह रहे हैं? क्या उनमें यह कहने का साहस है कि हमने अदालतों पर भी कब्जा कर लिया है। क्या यह संभव है।

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