Mohan Bhagwat: मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के दूसरे दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अंग्रेजी भाषा संघ की मूल कार्यपद्धति का हिस्सा कभी नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहां आवश्यकता होती है, वहां अंग्रेजी का उपयोग किया जाता है और किसी भी भाषा से उनका कोई विरोध नहीं है।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि संघ अपनी पहचान और मूल विचारधारा के साथ आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने दोहराया कि संगठन का उद्देश्य भारतीय मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखना है। कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिनमें फिल्म जगत के प्रमुख नाम शामिल थे।
Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "Now the English language will never become a part of the Sangh's methodology because it is not an Indian language. However, where English is necessary, we use it there. We do not quarrel with any language. We must remain what we… pic.twitter.com/053k4OTCxQ
— IANS (@ians_india) February 8, 2026
वीर सावरकर को भारत रत्न देने की वकालत
अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा जाना चाहिए। भागवत के अनुसार, सावरकर को यह सम्मान देने से स्वयं भारत रत्न की प्रतिष्ठा और गरिमा बढ़ेगी। इस दौरान कार्यक्रम में बॉलीवुड की कई दिग्गज हस्तियां जैसे करण जौहर, अक्षय कुमार, अनन्या पांडे और मधुर भंडारकर भी मौजूद रहे, जिन्होंने संघ की 100 साल की यात्रा के इस उत्सव में शिरकत की।
रिटायरमेंट पर बोले- 'संघ कहेगा तो अभी छोड़ दूंगा पद'
समारोह के दौरान एक इंटरएक्टिव सत्र में जब मोहन भागवत से उनके पद और उम्र को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, "आरएसएस में प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता, बल्कि क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख इसकी नियुक्ति करते हैं। सामान्य तौर पर माना जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति को बिना किसी पद के काम करना चाहिए।"
Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "...If Veer Savarkar is awarded the Bharat Ratna, the respect for that award will increase..."
— IANS (@ians_india) February 8, 2026
(Source: RSS) pic.twitter.com/rsiQUXOElm
उन्होंने खुलासा किया कि वह 75 वर्ष के हो चुके हैं और उन्होंने संगठन को इस बारे में सूचित भी कर दिया है, लेकिन संघ ने ही उन्हें अभी काम जारी रखने को कहा है।
काम से कभी नहीं होगा अवकाश
मोहन भागवत ने अपनी भविष्य की योजना स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसे ही संगठन उन्हें पद छोड़ने का निर्देश देगा, वह तुरंत पद त्याग देंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह पद भले ही छोड़ दें, लेकिन समाज के लिए 'काम' करना कभी बंद नहीं करेंगे। उनके शब्दों में, "पद से निवृति हो सकती है, लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।" भागवत का यह बयान उन चर्चाओं के बीच आया है जिनमें अक्सर संघ प्रमुख के उत्तराधिकारी और आयु सीमा को लेकर कयास लगाए जाते रहे हैं।











