Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

युवाओं में बढ़ रही हुक्का पीने की लत, कर रहे इन फ्लेवर से नशा

हुक्के के नशे की चपेट में सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे हैं।

युवाओं में बढ़ रही हुक्का पीने की लत, कर रहे इन फ्लेवर से नशा
नई दिल्ली. हुक्का गुड़गुड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी रही है लेकिन कभी बुजुर्गों का शौक रहे हुक्के का नशा आजकल युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। आधुनिक गैजेट्स की दीवानी युवा पीढ़ी हुक्के को अपने तकरें के आधार पर इसे शाही शौक मानकर बार का चक्कर लगा रही है। युवाओं की हुक्के के प्रति बढ़ती रुचि को भांप नशे के कारोबारियों ने इसे भुनाने के लिए सांकेतिक नामों से हुक्का बार खोलकर अपनी जेब भर रहे हैं। राजधानी में कुकुरमुत्ते की तरह खुले इन हुक्का बारों में हुक्के की कश ले हवा में धुएं को छल्ले की तरह उड़ाने वालों की भीड़ लगी रहती है। दिल्ली का ऐसा कोई भी इलाका नहीं है, जहां हुक्का बार न खुला हो। हुक्का बार खोलना मुनाफे का सौदा बन गया है।
पुलिस-प्रशासन से बचकर राजधानी में हुक्का बार कई वर्षों से धड़ल्ले से चल रहा है। कुछ वर्ष पूर्व एक एनजीओ ने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर कर ऐसे रेस्टोरेंट जहां खाने-पीने की चीजें परोसी जाती हैं, वहां हुक्का बार बंद किए जाने को लेकर पीआईएल दायर किया था। एनजीओ के अनुसार रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर नशे का कारोबार किया जा रहा है। वहां आने वाले परिवार को नशेड़ियों से खतरा रहता है। युवाओं को दिग्भ्रमित कर नशे की तरफ धकेला जा रहा है, जबकि म्युनिसिपल एक्ट के अनुसार ईटिंग प्वॉइंट के अंदर हुक्का बार नहीं चलाया जा सकता। कई हुक्का बार की आड़ में युवा अन्य नशीले पदाथरें का भी सेवन कर रहे हैं। हालांकि पुख्ता सबूत के अभाव में ये लोग पुलिस की पकड़ से बच निकलते हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कीर्ति नगर निवासी कॉलेज गोइंग एक छात्र ने बताया कि हमलोग व्हाट्स एप के जरिए अपने दोस्तों को हुक्का बार में एकत्रित होने का मैसेज देते हैं। कई बार इसके लिए कोड वर्ड का प्रयोग किया जाता है, तो कई बार इसके लिए सिर्फ हुक्के का फोटो भेजकर जगह का नाम लिखकर मैसेज किया जाता है। छात्र ने बताया कि कोड वर्ड में हुक्के को शीशा कहा जाता है। शीशे तक युवाओं की पहुंच बहुत आसान है। रेगुलर शीशे के लिए उन्हें 300 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। प्रीमियर शीशे के लिए 425 रुपये और पर्ल कंबो शीशे का रेट 555 रुपये है। वहीं बार मालिकों द्वारा एक हुक्का के साथ दो बीयर, एक हुक्का के साथ शेक और क्लब सैंडविच, एक हुक्का के साथ एक कॉकटेल जैसे लुभावने ऑफर देकर लोगों को इसका शिकार बनाया जाता है। वहीं बार में बच्चों को परोसे जाने वाले कुछ खास फ्लेवर में लेमन, सेलमॉन, कॉर्डिमॉम, ब्लू बेली, ग्रीन मिंट, पाइन एप्पल, लेमन मिंट, पीच, चॉकलेट, रोज, सिगार, समारोफ-69, कच्ची कली, एनर्जी शीशा, पान रस, पान मसाला, पान रसना, मैंगो, ब्रेन फीचर, निवार्णा, परपल सीसा, कोला, ऑरेंज, बून, ऑफ्टर-8, मैंगो एप्पल हैं। बता दें कि एनडीएमसी और एमसीडी अधिकारियों के अनुसार हुक्का बार के लिए लाइसेंस नहीं दिया जाता।
गांव की पंचायत में बड़े बुजुर्ग तम्बाकू से भरा हुक्का गुड़गुड़ाते हैं लेकिन दिल्ली के युवाओं में हुक्के में इस्तेमाल होने वाला फ्लेवर्ड टिकिया खासी चर्चित है। कुछ लोग तो इस टिकिया की जगह, नशे वाली टिकियों का इस्तेमाल करने से नहीं चूकते। युवाओं के बीच रखे कांच के हुक्के से उठता धुआं हुक्के के प्रति युवाओं के क्रेज को बयां करता है। हालांकि हुक्के में इस्तेमाल किए जाने वाले तम्बाकू की कई वैरायटी है। ढाई सौ से दो हजार रुपये खर्च कर किसी भी डिस्क में फ्लेवर्ड हुक्के का आंनद लिया जा सकता है।
हुक्के के नशे की चपेट में सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे हैं। कई बार तो वे स्कूल बंक कर दोस्तों के साथ हुक्काबार में नशा करते पकड़े जाते हैं। वहीं कॉलेज जाने वाले छात्र इसे शाही शौक मानते हैं। निधि (काल्पनिक नाम) तो बकायदा इसके लिए तर्क देते हुए कहती हैं कि पहले राजा-महाराजा भी इसे इस्तमाल करते थे। शाही अंदाज में बैठकर हुक्के का कश लगाने का आंनद ही कुछ और है। हुक्का इस्तेमाल करने वाले कुछ युवाओं के अनुसार सिगरेट का कश लगाने से जहां होंठ काले पड़ जाते हैं, वहीं हुक्के का नशा अपना निशान नहीं छोड़ता। सिगरेट की तरह हुक्का पीने से मुंह से दुर्गंध भी नहीं आती। हुक्का बार में नशा करने पर 500 से 1000 रुपये तक में नशे का शौक पूरा हो जाता है। साइकिएट्रिक सुधीर खंडेलवाल ने बताया कि शुरू में शौक के लिए लोग हुक्का पीते हैं लेकिन अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यह लत बन जाती है। क्लीनिक में आने वाले कुछ मरीज तो एडिक्शन के कारण खाने के दौरान भी बीच-बीच में हुक्का गुड़गुड़ाने की बात स्वीकार करते हैं। लेकिन तम्बाकू का किसी भी रूप में प्रयोग खतरनाक होता है। कैंसर के 50 फीसदी मरीजों का डायरेक्ट या फिर इन डायरेक्ट तम्बाकू सेवन से संबंध पाया गया है।
आकर्षक नाम वाले हुक्के के फ्लेवर्स
-पीने वाले को ठंडक भरा एहसास कराने के लिए तम्बाकू में मिंट का अतिरिक्त फ्लेवर मिलाया जाता है ।
-मीठे-कसैले स्वाद के लिए तम्बाकू में फलों का फ्लेवर भी मिलाया जाता है।
- ठंडे और गर्म असर के लिए दो फ्लेवरों का मिश्रण कर उसका कश लिया जाता है।
- रोमैंटिक मूड के लिए आडू या संतरे के फ्लेवर वाला तम्बाकू, हुक्के के अंदर डाला जाता है।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top