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#WorldDrugDay नशीली दवाओं की लत से होती है ये पांच गंभीर बिमारी, एड्स भी है शामिल

आज वर्ल्ड ड्रग डे है। नशीली दवाएं ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं, जो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को बदल देते हैं। कोई भी रसायन, जो किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक कार्यप्रणाली में बदलाव लाए, मादक पदार्थ कहलाता है।

#WorldDrugDay  नशीली दवाओं की लत से होती है ये पांच गंभीर बिमारी, एड्स भी है शामिल

आज वर्ल्ड ड्रग डे है। नशीली दवाएं ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं, जो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को बदल देते हैं। कोई भी रसायन, जो किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक कार्यप्रणाली में बदलाव लाए, मादक पदार्थ कहलाता है और जब इन मादक पदार्थों का उपयोग किसी बीमारी के इलाज या बेहतर स्वास्थ्य के लिए दवा के तौर पर किया जाए तो यह मादक पदार्थों का सही उपयोग कहलाता है लेकिन जब इनका उपयोग दवा के रूप में न होकर इस प्रकार किया जाए कि इनसे व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचे तो इसे ‘नशीली दवाओं का दुरूपयोग’ कहा जाता है। इसे पांच भागों में बांटा गया है।

1) उत्तेजक- ये वे मादक पदार्थ हैं, जो मस्तिष्क के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्रों की सक्रियता बढ़ा देते हैं। जैसे, बैंजोड्रिन, डैक्सेड्रिन, मैथेड्रिन, कोकीन, निकोटीन आदि।

2) उपशामक- ये मादक पदार्थ मस्तिष्क की सक्रियता कम कर देते हैं। ये पदार्थ हैं, अल्कोहल, सिकोनाल, गार्डेनाल, वैलियम, लिबियम, मैन्ड्रेक्स, डोरिडेन आदि।

3) निश्चेतक और दर्दनाशक- अफीम, मॉर्फीन, कोकीन, हेरोइन, ब्राउन शूगर, पेथीडीन, मेप्राडीन आदि।

4) भांग से बने पदार्थ:- गांजा, हशीश, चरस आदि।

5) मतिभीरम पदार्थ:- ये पदार्थ हमारे देखने, सुनने और महसूस करने की क्षमता पर बुरा प्रभाव डालते हैं।

मादक पदार्थों के सेवन का आदी हो जाने पर व्यक्ति में प्राय: निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते हैं। खेलकूद और रोजमर्रा के कार्यों में दिलचस्पी न रहना, भूख कम लगना, वजन कम हो जाना, शरीर में कंपकंपी छूटना, आंखें लाल, सूजी हुई रहना, दिखाई कम देना, चक्कर आना, उल्टी आना, अत्यधिक पसीना आना, शरीर में दर्द, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, आलस्य, निराशा, गहरी चिन्ता आदि। सुई के जरिये मादक पदार्थ लेने वालों को एड्स का खतरा भी रहता है।

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