Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

महिलाओं में डायबिटीज की लापरवाही हो सकती है खतरनाक

महिलाओं में इसके कारण समस्याएं अधिक हो सकती हैं।

महिलाओं में डायबिटीज की लापरवाही हो सकती है खतरनाक

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डायबिटीज ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड हो सकता है। इससे उन्हें कई तरह की गाइनिक प्रॉब्लम्स का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में लापरवाही बरतना खतरनाक हो सकता है। सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नुपुर गुप्ता के अनुसार, हम आपको बता रहे हैं डायबिटीज से जुड़ी कुछ बहुत जरूरी बातें।

डायबिटीज पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से ही प्रभावित करता है। लेकिन महिलाओं में इसके कारण जटिलताएं अधिक हो सकती हैं। खासकर डायबिटीज से पाड़ित महिलाओं को प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम आ सकती है, उनका मिसकैरिज हो सकता है या बच्चा विकृति के साथ जन्म ले सकता है। जो महिलाएं डायबिटीज से पीड़ित होती हैं, उन्हें हार्ट अटैक होने की आशंका उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है, जो स्वस्थ होती हैं।

डायबिटीज के कारण महिलाओं में पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर समय रहते इसका पता नहीं चल पाए और इसे नियंत्रित ना किया जाए, तो किडनी फेल होने, ब्रेन स्ट्रोक, रेटिनोपैथी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

डायबिटीज के प्रकार

महिलाओं में सबसे कॉमन गेस्टेशनल डायबिटीज होता है। यह हाइपरग्लाइसेमिया है, जिसके लक्षण कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान दिखाई पड़ते हैं। इसके लक्षण टाइप 2 डायबिटीज के समान ही होते हैं।

महिलाओं में गेस्टेशनल डायबिटीज के अलावा टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज के मामले भी काफी देखे जाते हैं। इन दिनों डायबिटीज के एक और प्रकार टाइप 1-5 के मामले भी सामने आ रहे हैं।

प्रमुख लक्षण

प्यास अधिक लगना, बार-बार पेशाब आना, तेजी से वजन घटना, खाने के बाद भी भूख लगना, नजर कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, हाथ-पैरों में झुनझुनी या अकड़न, त्वचा या मसूड़ों में संक्रमण, जख्म का ठीक नहीं होना, खुजली होना, थकान महसूस करना, वैजाइना में फंगल इंफेक्शन, यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाले डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।

रिस्क फैक्टर

उन महिलाओं में डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है, जो 45 वर्ष से अधिक आयु की हैं, जिनका वजन औसत से अधिक है, प्रेग्नेंसी के दौरान गेस्टेशनल डायबिटीज से ग्रस्त हो चुकी हैं, पॉली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम से पीड़ित हैं और जिन्हें हाई बीपी है।

प्रभावी उपाय

ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करने में करेला, मेथी, एलोवेरा, नीबू, ग्रीन टी, लहसुन और पालक का सेवन लाभकारी होता है। इसके साथ ही डायबिटिक पेशेंट्स को चीनी, तली-भुनी चीजें, डेयरी उत्पाद, चाय-कॉफी, तंबाकू, शराब, अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ जैसे आलू, गाजर, चावल, केला और ब्रेड से परहेज करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी और डायबिटीज

एक अनुमान के अनुसार 17 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाओं का बॉडी वेट सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इससे उनके गेस्टेशनल डायबिटीज की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। 2.5 प्रतिशत महिलाओं को गेस्टेशनल डायबिटीज होती है, जो डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है लेकिन इसमें से 20.50 प्रतिशत महिलाओं को बच्चे के जन्म के 5-10 साल में टाइप 2 डायबिटीज हो जाती है। जो महिलाएं गेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित होती हैं, उनके बच्चे में बड़े होकर टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।

वैसे तो डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं लेकिन अगर ब्लड शुगर को नियंत्रित ना किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं में मिसकैरिज, मैक्रोसोमिया (बच्चे का भार और आकार सामान्य से अधिक होना), बच्चों में आगे चलकर मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाना, जन्म के बाद बच्चे को सांस की तकलीफ होना, उसका शुगर लेवल बढ़ जाना और पीलिया होना सम्मिलित हैं।

Next Story
Top