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जानिए क्या होती है अति भावुकता और इसके नुकसान

महिलाओं को स्वभाव से ही भावुक माना जाता है। लेकिन कई महिलाएं जरूरत से ज्यादा भावुक होती हैं। उनका ऐसा स्वभाव दूसरों को तो परेशान करता ही है, उनके स्वयं के लिए भी काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। अगर आप भी ऐसे स्वभाव की हैं तो स्वयं को बदलने की जरूरत है।

जानिए क्या होती है अति भावुकता और इसके नुकसान
घर हो या कॉलेज मानसी से सब लोग दूर-दूर ही रहते हैं, क्योंकि कभी किसी बात पर उसकी प्रतिक्रिया सामान्य नहीं होती। किसी के साथ कुछ अनहोनी होने की खबर मिले तो मानसी ही सबसे अधिक परेशान और दुखी नजर आती है। भले ही वह उससे जुड़ी न हो। उसको हर बात पर रोने-धोने वाली माना जाता है। इसलिए सभी उससे दूरी बनाकर रखना चाहते हैं। सवाल है क्या मानसी का व्यवहार असामान्य है? दरअसल, मानसी अति भावुकता की शिकार है।

क्या है अति भावुकता

भावुक होना बुरी बात नहीं, लेकिन अति भावुक होना अकसर आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है और यही भावुकता बढ़ती जाए तो आप अति भावुकता की शिकार बन सकती हैं। अति भावुकता आगे चलकर एक मानसिक बीमारी का रूप भी ले सकती है। इसलिए जरूरी है कि अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए अति भावुकता से बचा जाए।एक धारणा है कि महिलाएं अति भावुकता की शिकार अधिक होती हैं। आप अगर अपने आस-पास नजर डालें तो कई ऐसी महिलाएं मिल जाएंगी, जो छोटी-छोटी बातों पर भी विचलित हो जाती हैं या फिर अति भावुकता में उचित-अनुचित कदम उठा लेती हैं। जरा-जरा-सी बात पर रो देना या मामूली बात को लेकर परेशान हो जाने वाली महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, अति भावुकता की श्रेणी में ही रखते हैं।

स्वयं के लिए हानिकारक

इस बात में संदेह नहीं कि भावनाएं इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा होती हैं। भावनाएं अच्छी होती हैं, उनसे आपके सोचने-समझने का नजरिया बनता है। आपके जीवन की दिशा तय करती हैं अच्छी भावनाएं! बिना भावनाओं के इंसान सहज-संवेदनशील नहीं हो सकता है। भावनाएं किसी में कम होती हैं तो किसी में अधिक। भावनाएं कम होती हैं तो व्यक्ति निर्दयी और कठोर मान लिया जाता है और अधिक होती हैं तो दूसरों के लिए कम अपने लिए ही मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसानदायक बन जाती हैं।

आत्मविश्लेषण करें

अति भावुक महिलाओं के बारे में मनोचिकित्सक डॉ. प्रतिभा सिंह कहती हैं, ‘ऐसी महिलाएं गलत और सही में फर्क नहीं कर पाती हैं और जज्बात में बह जाती हैं। इससे बचने के लिए आपको आत्मविश्लेषण करना होगा। आप जिन लोगों के साथ रह रही हैं या फिर काम कर रही हैं, वे आपको कितना समझते हैं, वक्त आने पर आपके लिए कितने हेल्पफुल हो सकते हैं, यह आपको ही देखना होगा। अकसर आपकी भावुकता से फायदा उठाने वाले ऐसी स्थितियां पैदा कर सकते हैं कि आप उनकी बातों पर विश्वास करें। आगे चलकर वे अपना काम निकाल चलते बनते हैं और आप अपने को ठगा महसूस करने लगती हैं।’ ऐसा न हो, इसके लिए तार्किक और व्यावहारिक होकर सोचना जरूरी है।

सोच-समझकर करें रिएक्ट

मनोवैज्ञानिक भावुकता को कोई समस्या नहीं मानते लेकिन हर बात पर भावुक होना या फिर आप जो महसूस कर रही हैं वही ठीक है, यह मान लेना,
गलत है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे व्यवहार से दूसरों को परेशानी होती है। मिसाल के तौर पर यदि आप किसी दफ्तर में जॉब करती हैं और आपका बॉस या आपके सहयोगी कभी हंसी-मजाक करते हैं या फिर कभी गुस्से में कोई तीखी बात कह देते हैं तो उस पर तुरंत अतिभावुक होकर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि आप अपने मन को शांत रख, थोड़ी देर सोचें कि मुझे क्या करना चाहिए या क्या बोलना चाहिए। हो सकता है कि जो आप समझ रही हैं, हकीकत उससे भिन्न हो।

वर्कप्लेस पर रहें कॉन्शस

आपकी अतिभावुकता की आदत से आपकी टीम का कोई सदस्य फायदा भी उठा सकता है। इसलिए जो महिलाएं जॉब करती हैं, उन्हें बहुत सोच-समझ के साथ अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए। आप अगर बड़े पद पर हैं या किसी टीम का नेतृत्व करती हैं तो और भी संभलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की आवश्यकता है। मशहूर लेखिका ब्रिगिटी निकोल के शब्दों में, ‘अपनी भावना व्यक्त करना ताकत की निशानी है।’ लेकिन यह भी ध्यान रखें कि अति भावुकता कमजोरी की निशानी मानी जाती है, इसलिए कमजोर मत बनिए, अति भावुकता से बचिए।
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