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ऑफिस में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना इमेज हो सकती है खराब

कुछ वर्किंग वूमेन घर-ऑफिस की जिम्मेदारियों से इतना परेशान हो जाती हैं कि अपने इमोशंस पर कंट्रोल नहीं कर पाती हैं। इससे वर्कप्लेस पर उनकी इमेज बिगड़ती है, उनके करियर में भी रुकावट आती है। इसलिए जरूरी है कि वर्कप्लेस पर कुछ बातों का ध्यान रखें।

ऑफिस में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना इमेज हो सकती है खराब
यह सही है कि महिला हो या पुरुष, ऑफिस में काम करने वालों की अपनी निजी पारिवारिक समस्याएं भी होती हैं। इन समस्याओं के कारण कोई भी तनाव, क्रोध और अवसाद का शिकार हो सकता है। इसके साथ ही कड़ी प्रतिस्पर्धा, काम का दबाव, निरंतर नंबर वन बने रहने की होड़, छुट्टी न मिलने के कारण भी तनाव बढ़ता है। महिलाएं चूंकि ज्यादा इमोशनल होती हैं, इसलिए वे ऐसे तनाव से ज्यादा प्रभावित होती हैं। लेकिन ऐसे में वर्कप्लेस पर अपने सहयोगियों से बहस करना, बात-बात पर ओवर रिएक्ट करना, चिड़चिड़ाना, झल्लाना जैसे रिएक्शंस करियर और इमेज पर बुरा असर डालते हैं। इससे आपकी कार्य क्षमता पर तो बुरा असर पड़ता ही है। इसलिए वजह चाहे जो भी हो लेकिन ऑफिस में अपने इमोशंस पर कंट्रोल रखना चाहिए।

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तुरंत न करें रिएक्ट

बेकाबू भावनाएं आपके व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह तो लगाती ही हैं, इससे आपकी तरक्की के रास्ते भी बंद हो जाते हैं और आप ऑफिस में काम करने वाले दूसरे लोगों के लिए एक मजाक का विषय बन सकती हैं। दरअसल, इमोशंस में बहकर आपको पता ही नहीं चलता कि कब सहकर्मी से बात करते-करते आपका स्वर तेज हो जाता है। वहीं कुछ महिलाएं अपने स्वभाव की आक्रामकता और गुस्से को छुपाने में माहिर होती हैं, वह दूसरों के सामने स्पष्ट और साफ शब्दों में कुछ न बोलकर पीठ पीछे बुराई करने लगती हैं जिससे ऑफिस का माहौल खराब होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी भी मुद्दे पर एकदम से रिएक्ट न करें, सोच-समझ कर बोलें।

इन पर करें अमल

-दूसरों की शिकायत, दूसरों के काम में नुक्स निकालने और मामूली बात पर रोने की बजाय शांत रहें।
-किसी भी बात पर ओवर रिएक्ट करने की बजाय, जो बोलें उचित समय पर सोच-समझकर बोलें। इससे मानसिक रूप से शांति तो मिलती ही है, खुद को भी टेंशन फ्री रख सकती हैं।
-ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने के लिए टाइम मैनेजमेंट करें ताकि घर पर ऑफिस और ऑफिस में घर का तनाव आपकी बेकाबू भावनाओं की वजह न बने।
-अपने किसी सहयोगी से ईर्ष्या करने की बजाय अपनी काबिलियत पर विश्वास रखें, क्योंकि अपने से ज्यादा योग्य सहकर्मी से असुरक्षा महसूस होने पर आपका रवैया उसके प्रति नकारात्मक होने लगता है।
-समय से ऑफिस पहुंचें ताकि आप पर लेटलतीफ होने का लेबल न लगे और किसी के द्वारा प्रतिक्रिया करने पर ओवर रिएक्ट न करें, साथ ही अपनी पारिवारिक और घर-परिवार की समस्याओं का रोना सहयोगियों के साथ न रोएं।
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