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ऐसे पहचाने कहीं आपको भी तो नहीं ''विंटर डिप्रेशन''

सर्दियों में सुसाइड के मामले बाकी मौंसमों के मुकाबले बढ़ जाता है।

ऐसे पहचाने कहीं आपको भी तो नहीं
नई दिल्ली. मौसम बदलने का प्रभाव सिर्फ स्वास्थ्य पर ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जैसे सर्दियों में कई लोगों का मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है। वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं। इनमें से कुछ लोग तो समझ ही नहीं पाते हैं कि उनके साथ आखिर हो क्या रहा है? डिप्रेशन की ये समस्या कई बार इतनी बढ़ जाती है कि उनमें सुसाइड करने की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है। सुसाइड के आंकड़ों को देखें तो यह निष्कर्ष आसानी से निकाला जा सकता है कि सर्दियों में सुसाइड के मामले बाकी मौंसमों के मुकाबले बढ़ जाता है। यह समस्या पुरुष के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। हालांकि मौसम के प्रभाव के साथ ही कई दूसरे कारण भी विंटर डिप्रेशन की वजह हो सकते हैं। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखते हुए अपनी जीवनशैली में जरूर बदलाव करके आप विंटर डिप्रेशन से बच सकते हैं। कौन सी हैं वो जरूरी बातें, जानिए।
इसलिए होता है विंटर डिप्रेशन
मौसम में होने वाले बदलाव के कारण होने वाले डिप्रशन को सीजनल इफेक्टिव कहते हैं। इनमें विंटर डिप्रेशन सबसे प्रमुख है। सर्दियों में दिन छोटे और रातें बड़ी हो जाती है और जागने-सोने का चक्र गड़बड़ा जाता है, जिससे थकान होती है। सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने का अर्थ है कि आपका दिमाग ज्यादा मात्रा में मेलैटोनिन हार्मोन बना रहा है, जो आपको उनींदा बनाता है। क्योंकि इस स्लीप हार्मोन का सीधा संबंध रोशनी और अंधेरे से होता है। सर्दियों में जब सूरज जल्दी छिप जाता है तो हमारा ब्रेन मेलैटोनिन बनाने लगता है जिससे शाम होते ही हमारा सोने का मन करता है, हम जल्दी बिस्तर में जाना चाहते हैं। सर्दियों में हमारी शारीरिक सक्रियता भी थोड़ी कम हो जाती है। हम थका-थका सा महसूस करते हैं। यह थकावट और आलस गंभीर विंटर डिप्रेशन का संकेत भी हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में सीजनल इफेक्टिव डिस्ऑर्डर कहते हैं।
ये है लक्षण
- सुस्त या उत्तेजित अनुभव करना।
- थकान या ऊर्जा की कमी।
- दूसरे के साथ घुलने मिलने में समस्या आना।
- नकारात्मकता के प्रति अति संवेदनशील होना।
- अधिक नींद आना।
- भूख में बदलाव आना, विशेष रूप से वह बोजन खाने की इच्छा होना जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो।
- लोगों से कटे-कटे रहना।
- आशाहीन अनुभव करना।
- चीजों और अपने काम में रूचि कम लेना।
- सोने में समस्या होना।
- ध्यान केंद्रित करने में समस्या आना।
- अक्सर आत्महत्या का ख्याल आना।
- डॉक्टरों का कहना है कि विंटर डिप्रेशन के लक्षण को गंभरता से लें। जैसा सामान्य अवसाद के साथ होता है, अगर उपचार ना कराया जाए तो लक्षण और गंभीर हो जाते हैं।
ऐसे बचे इस बीमारी से
- जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके प्राकृतिक रोशनी लें।
- विटामिन डी प्राप्त करने के लिए धूप में बैंठे।
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
- नियत समय पर डॉक्टर की दी हुई दवाईयों का सेवन करें।
- संतुलित और पौष्टिक भोजन का सेवन करें।
- पर्याप्त आराम करें और 6-8 घंटे की नींद लें।
- तनाव से बचें।
- दोस्तों और रिश्तेदारों के संपर्क में रहें। उनसे मन की बातें करें।
- कुछ समय अपने लिए और अपनी फैमिली के लिए जरूर निकालें। इससे आपको अच्छा फील होगा।
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