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ठंड में रोज आधे घंटे के लिए करें ये काम, नहीं होगी कोई बीमारी

वैसे तो नियमित योगाभ्यास हर मौसम में किया जाना चाहिए। लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी जरूरत और भी बढ़ जाती है।

ठंड में रोज आधे घंटे के लिए करें ये काम, नहीं होगी कोई बीमारी

वैसे तो नियमित योगाभ्यास हर मौसम में किया जाना चाहिए। लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी जरूरत और भी बढ़ जाती है। कुछ खास योगासन करके इम्यूनिटी लेवल को बढ़ाकर सर्दी में होने वाली बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। सर्दी के मौसम में विशेष रूप से किन योगासन को करना चाहिए इस बारे में योगा ट्रेनर जितेंद्र कौशिक जानकारी दे रहे हैं।

सर्दियों में हमें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं परेशान करती हैं। खांसी-जुकाम और बुखार बार-बार होता है। असल में इसकी वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना है। लेकिन इस मौसम में भी बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। अगर नियमित कुछ खास तरह के योगासन किए जाएं, तो इम्यूनिटी को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इनको करने से सर्दी के मौसम में भी एनर्जेटिक रहा जा सकता है।

पश्चिमोत्तानासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं। दोनों पैरों को सामने फैलाएं। इस दौरान आप पीठ की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें। सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं और फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। इस दौरान धीरे-धीरे सांस लें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। फिर वापस सामान्य अवस्था में लौट आएं। आप इस आसन को शुरुआत में तीन से पांच बार कर सकती हैं। इस आसन को करते समय कभी भी झटके से करने का प्रयास न करें और न ही जल्दबाजी करें। इस आसन को हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए।

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कूर्मासन

सबसे पहले आप बैठ जाएं। अपने पैर को दोनों ओर फैलाएं और सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। अब हाथों को पैरों के नीचे से ले जाएं और फैला दें। अब कमर से रीढ़ की हड्डी को खींचने की कोशिश करें और जमीन पर माथा लगाने का प्रयास करें। इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस लें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। सांस लेते हुए आरंभिक अवस्था में आएं। आप इस आसन को 3 से 5 बार करें। शुरुआती दौर में, इसे करने में आपको थोड़ी समस्या हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास से आप इसमें निपुण हो जाएंगी। यह आसन शरीर के विभिन्न अंगों को उत्तेजित करते हुए आपको तरोताजा बनाए रखता है, इसलिए सर्दियों के मौसम के लिए यह एक उत्तम आसन है।

मंडूकासन

सबसे पहले घुटने मोड़कर वज्रासन में फर्श पर बैठ जाएं। अब मुट्ठी बांधें और इसे अपनी नाभि के पास लेकर आएं। मुट्ठी को ना•िा और जांघ के पास ऐसे रखें कि मुट्ठी खड़ी हो और अंगुलियां आपके उदर की तरफ हों। अब सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और छाती को इस तरह नीचे लाएं कि वह जांघों पर टिकी रहे। साथ ही कोशिश करें कि नाभि पर ज्यादा से ज्यादा दबाव आए। आसन के दौरान अपना सिर और गर्दन उठाए रखें और दृष्टि सामने की ओर रखें। साथ ही सांस भी धीरे-धीरे लें और छोड़ें। सांस लेते हुए अपनी सामान्य अवस्था में वापस लौट आएं। चूंकि शरीर में गर्मी पेट के माध्यम से ही उत्पन्न होती है और यह उदर के लिए एक बेहतरीन व्यायाम है, इसलिए सर्दियों में इसे करना अच्छा रहता है।

शशकासन

सबसे पहले आप पद्मासन में बैठ जाएं और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब दोनों घुटनों के बीच दूरी बनाएं। साथ ही दोनों बांहें भी सिर के ऊपर उठाएं। बांहों को कंधे की चौड़ाई जितनी दूरी पर रखें। सांस छोड़ते हुए और बांहें सीधी रखते हुए कमर से आगे की ओर झुकें। इस दौरान आपके ठोड़ी और बांहें फर्श पर टिकी होनी चाहिए और नजरें सामने की ओर होनी चाहिए। थोड़ी देर इस अवस्था में रहने के बाद सांस लेते हुए धीरे-धीरे आरंभिक अवस्था में आ जाएं।

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सूर्यभेदी प्राणायाम

सबसे पहले आप आंखें बंद करके पद्मासन में बैठ जाएं। दाहिने हाथ की अनामिका और छोटी अंगुली से बार्इं नासिका को बंद करें और बिना आवाज किए दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे सांस लें। अब दाहिनी नासिका को अंगूठे से बंद करें और अपनी ठोड़ी को सीने की ओर मजबूती से दबाते हुए सांस रोकें। यह स्थिति कुंभक कहलाती है। अब कुंभक की अवधि को धीरे-धीर बढ़ाएं। फिर अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बार्इं नासिका से बिना कोई आवाज किए धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें। सांस लेना, सांस छोड़ना और कुंभक का जो अनुपात है, वह 1:2:4 का होना चाहिए।

भस्त्रिका प्राणायाम

पद्मासन में बैठ जाएं और कमर, गर्दन, पीठ और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाए, दोनों नासिका छिद्रों से आवाज करते हुए श्वांस भरें और बाहर निकालें। श्वांस लेने और छोड़ने की गति तीव्र होनी चाहिए। श्वांस लेते समय पेट बाहर की ओर फुलाना है और श्वांस छोड़ते समय पेट अंदर की ओर खींचना है। यह प्रक्रिया करते समय केवल आपका पेट हिलना चाहिए, छाती स्थिर रहनी चाहिए। इस तरह कम से कम 20 बार अवश्य करें। इस प्राणायाम में श्वांस लेने और छोड़ने का समय समान रखें।

कपालभाति

सर्वप्रथम पद्मासन में बैठ जाएं। गहरी लंबी सांस लें। अब सांस छोड़ते हुए अपने पेट को जितना संभव हो अंदर की ओर खींचें। जितना कर सकें, उतना ही करें। जब आपको थकान महसूस होने लगे, तो रुक जाएं। शुरुआत में इस क्रम को 20-25 सेकेंड तक करें। दूसरे क्रम को कुछ देर रुक कर जारी कर सकती हैं।

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अन्य कारगर योगासन

ऊपर बताए गए योगासनों के अलावा आप शुरुआत में कुछ अन्य योगासन भी कर सकती हैं। ये योगासन आपके लिए वॉर्मअप का काम करेंगे। इससे आपका शरीर जटिल योगासन करने के लिए तैयार हो जाएगा। इनमें ग्रीवा शक्ति विकासक, पूर्णभुजाशक्ति विकासक, कटिचक्रासन क्रिया और सर्वांगपुष्टि, किए जा सकते हैं।

यह सभी योगासन किसी विशेषज्ञ की देख-रेख में ही करें। अगर आपको कमर दर्द की शिकायत है, तो आप आगे की ओर झुकने वाले आसन न करें।

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