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समलैंगिक और यौन मुद्दों के लिए सहाय हेल्पलाईन, TOLL FREE 1800-2000-113

31 मई, 2014 को समाप्त हुए सहाय इस ऑपरेशनल परिसंधान परियोजना ऑपरेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट के अंतर्गत डेटा मॉनिटरिंग और रिसर्च डेटा एकत्रित किया हैं।

समलैंगिक और यौन मुद्दों के लिए सहाय हेल्पलाईन, TOLL FREE 1800-2000-113
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31 मई, 2014 को समाप्त हुए सहाय ऑपरेशनल परिसंधान परियोजना ऑपरेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट के अंतर्गत सेवा प्रदान करना एक बहुत बड़ा अवसर था। सेवा प्रदान करने के दौरान कुछ डेटा मॉनिटरिंग और रिसर्च डेटा एकत्रित किया हैं, जिसका विश्लेषण किया जा रहा है। विश्लेषण के बाद जल्द ही भारत सरकार के 'डिपार्टमेंट ऑफ़ एड्स कंट्रोल' के साथ शेयर किया जाएगा। डिपार्टमेंट ऑफ़ एड्स कंट्रोल इसके बाद इस हेल्पलाइन के प्रारूप को ऐसे ही रखके पुनरुज्जीवित करने का विचार है या फिर कुछ बदलाव करके फिर से सेवा देना , यह अभी तय नहीं है।
भारतीय कानून ने समलैगिकता का कानून पास कर सभी को अपनी जिदंगी जीने का एक और अधिकार दिया है। जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से अपनी पंसद के जीवन साथी को चुन सकता है और जिदंगी भर उसके साथ रह सकता है। लेकिन वहीं दूसरी ओर जब बात पुरुष से पुरुष के संबध की बात आती है तो यह एक अपराध की श्रेणी में माना जाता है। खासतौर तब जब एक पुरुष दूसरे पुरुष से शारीरिक संबध स्थापित करता है। इसका मुख्य कारण एचआईवी एड्स और अन्य बीमारी को माना गया है। लेकिन इसके अलावा ऐसे बुहत से प्रश्न है जिनका उत्तर अभी भी मिलना बाकी है।
इसी तरह से सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए एक
हेल्पलाईन
"सहाय" जारी की गई थी जिसे साल 2013 में लाया गया था। जानकारी के अनुसार शुरुआती नौ महिनों में एक लाख से भी ज्यादा कॉल इस हेल्पलाईन नंबर पर आई। हेल्पलाईन सहाय मुख्य रुप से छत्तीसगढ़, दिल्ली और महाराष्ट्र में चलाई गई। सहाय को एक अंतराष्ट्रीय एनजीओ "फैमली हेल्थ इटंरनेशनल 360" द्वारा चलाया गया जो कि एड्स कन्ट्रोल संगठन के साथ कार्यरत थी जिसका संबध एनएसीओ से भी था।
आपको बता दें कि सहाय हेल्पलाईन केवल नौ माह तक ही कार्यरत रही। हेल्पलाईन सितंबर 2013 से मई 2014 तक सेवा प्रदान करती रही। जिस दौरान 39800 लोगों ने एक लाख से भी ज्यादा कॉल कर इस सुविधा का लाभ लिया। सहया के प्राजेक्ट डॉरेक्टर अशोक अग्रवाल ने बताया कि कार्य के दौरान 99.81 प्रतिशत कॉल में से 81.33 प्रतिशत कॉल का जवाब सही और सटीक ठंग से दिया जाता था। रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत लोग ऐसे होते थे जिन्हें पिछले एक साल में एक भी बार अपना एचआईवी टेस्ट नहीं कराया होता था। इसका मुख्य कारण यह बताया गया कि आधे से ज्यादा लोग केवल डर के कारण अपना एचआईवी टेस्ट नहीं कराते।
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