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Raksha Bandhan 2019 : राखी पर जानें भाई-बहन के रिश्ते का महत्व

Raksha Bandhan 2019 भारत में भाई-बहन कैसे राखी के एक कच्चे धागे की डोर से ताउम्र जुड़े रहते हैं, ऐसी मिसाल दुनिया में विरल है। इसके लिए रक्षाबंधन के निहितार्थ और असल भावना को समझना होगा। इस पर्व की महत्ता को रेखांकित करता आलेख।

Raksha Bandhan 2019 : राखी पर जानें भाई-बहन के रिश्ते का महत्व
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Raksha Bandhan 2019 Improtance of Brother Sister Relation In Hindi

Raksha Bandhan 2019 : भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश में भाई और बहन के रिश्ते की इतनी बहुआयामी परतें नहीं दिखतीं। हमारे यहां भाई-बहन का रिश्ता, रिश्तों की संवेदनशीलता का सर्वोच्च शिखर है। यह शिखर तब और स्वर्णिम हो जाता है, जब इसमें कुछ धर्म, कुछ संस्कृति और कुछ सभ्यता के रंग मिला दिए जाते हैं।

ऐसे ही भाई और बहन के रिश्ते को बड़ी संवेदना से भारत में विकसित किया गया है और इस रिश्ते से जोड़ा गया है, रक्षाबंधन का त्योहार। हमारे यहां राखी का सांस्कृतिक त्योहार भाई-बहन को आपस में और भी गहनता से जोड़ने का काम करता है, जबकि दुनिया के किसी भी दूसरे समाज में भाई और बहन को संवेदनाओं के स्तर पर इतने नजदीक लाने का दूसरा कोई जरिया नहीं दिखता है।




जुड़ाव का जरिया राखी का त्योहार

दुनिया के दूसरे कई देशों में एक बार बहन शादी के बाद घर से निकलती है तो प्राय: उसका मां-बाप के घर से स्थाई रिश्ता नहीं रह जाता। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। भारत अकेला ऐसा देश है, जहां एक पिता की तमाम संतानों के बीच जीवन भर का एक ठोस रिश्ता होता है। भले वे अलग-अलग जगहों पर रहते हों।

ब्रिटेन, अमेरिका, अरब देश यहां तक कि चीन और मिस्र जैसे प्राचीन संस्कृति वाले देशों में भी शादी हो जाने के बाद जरूरी नहीं है कि किसी लड़की का अपने पैतृक घर से जीवनभर का रिश्ता बना रहे। अकेला भारत ऐसा देश है, जहां इसे सांस्कृतिक बंधन बना दिया गया है। बहन शादी हो जाने के बाद भी ताउम्र अपने भाई से राखी के बंधन के चलते जुड़ी रहती है, साथ ही अपने मायके से भी जुड़ी रहती है।




बना रहता है मिलने का सिलसिला

राखी का त्योहार भाई-बहनों को ताउम्र जोड़े रखने वाला सबसे प्यारा और सबसे संवेदनशील बंधन है। दुनिया के दूसरे देशों में ऐसा कोई चलन नहीं है कि बचपन में साथ रहे भाई और बहन हर साल किसी न किसी वजह से मिलते-जुलते रहें।

भारत अकेला ऐसा देश है, जहां बहनों का भाइयों के घर आने चलन है। दूसरे देशों में ऐसी कोई वजह नहीं होती कि हर साल बहन को अपने मायके यानी भाई के पास आना पड़े। खासकर मां-बाप के न रहने के बाद।




कभी नहीं होते एक-दूसरे से दूर

भारत में भाई और बहन का रिश्ता, पति और पत्नी के रिश्ते से भी ज्यादा प्रगाढ़ होता है। भाई और बहन के रिश्ते को इस कदर मजबूती प्रदान करने में सबसे बड़ा योगदान रक्षाबंधन के त्योहार का है। रक्षाबंधन के बहाने बहन ताउम्र भाई के साथ जुड़ी रहती है।

भाई उसके सुख-दुख का आजन्म साथी होता है। यूं तो आपस में दुनिया के कोई भी भाई-बहन जुड़े रहते हैं और जुड़े रह सकते हैं, लेकिन हर साल भाई-बहन के रिश्ते को फिर से बचपन वाले अहसास के साथ नवीकरण (रीन्यू) करना सिर्फ रक्षाबंधन जैसे त्योहार के बस में ही है।

रक्षाबंधन में कलाई में राखी या रक्षासूत्र के नाम पर जिस भी रेशमी धागे को बांधा जाता है, उसका महत्व तो बस प्रतीकात्मक है। इस रिश्ते का सबसे बड़ा और पूरी दुनिया के लिए जरूरी संदेश एक ही कोख से पैदा होने वाले भाई-बहनों के बीच आजन्म रिश्ते को बनाए रखना है। इसीलिए राखी का त्योहार भाई और बहन की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन जाता है।

चूंकि आज ही नहीं किसी भी दौर की यह हकीकत रही है कि अगर कोई शख्स आपसे सालों तक न मिले फिर चाहे वो जितना ही अजीज क्यों न हो, उसके प्रति मोह खत्म हो जाता है। शायद इसीलिए भाई-बहन के रिश्ते को ताउम्र बनाए रखने के लिए रक्षाबंधन जैसे त्योहार की परंपरा शुरू की गई।

लेखिका - नम्रता नदीम

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