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छोटी उम्र में दिखें ये लक्षण तो तुरंत ट्रीटमेंट करवा लें लड़कियां, वरना बाद में होती है मां बनने में परेशानी

महिलाओं और लड़कियों में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) होना एक कॉमन हार्मोनल डिजीज है, जो उनमें इंफर्टिलिटी (Infertility) का एक मुख्य कारण है। इसका जितना जल्दी हो सके ट्रीटमेंट करा लेना चाहिए, वरना आगे चलकर लड़कियों को मां बनने में परेशानी हो सकती है।

छोटी उम्र में दिखें ये लक्षण तो तुरंत ट्रीटमेंट करवा लें लड़कियां वरना बाद में होती है मां बनने में परेशानी
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छोटी उम्र में दिखें ये लक्षण तो तुरंत ट्रीटमेंट करवा लें लड़कियां वरना बाद में होती है मां बनने में परेशानी 

Women Health Care Tips : महिलाओं और लड़कियों में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) होना एक कॉमन हार्मोनल डिजीज है, जो उनमें इंफर्टिलिटी (Infertility) का एक मुख्य कारण है। यह रोग टीनएज से लेकर रिप्रोडक्टिव एज (15-35 साल) की युवा महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है। 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में यह समस्या लगभग ठीक होने लगती है, क्योंकि इस उम्र में उनकी ओवरी में एग्स बनने कम हो जाते हैं। हमारे देश में लगभग 15-20 प्रतिशत महिलाओं में पीसीओएस की समस्या पाई जाती है।

रोग के कारण

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजुषा गोयल बताती हैं कि यह रोग, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्राजेस्ट्रॉन हार्मोन में असंतुलन की वजह से होता है। जब उनके शरीर में फीमेल हार्मोंस (एस्ट्रोजन, प्राजेस्ट्रॉन) की तुलना में मेल हार्मोंस (टेस्टोस्टेरॉन) की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो ओवरी में एग्स बनने बंद हो जाते हैं यानी, ओव्यूलेशन नहीं हो पाता। इससे महिला में पीरियड्स और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

इनका भी पड़ता है प्रभाव

पीसीओएस (PCOS) होने के पीछे लाइफस्टाइल का भी बड़ा रोल होता है। यह डिजीज गांवों के बजाय सुविधासंपन्न और आरामपरस्त जीवनशैली की वजह से शहर में रहने वाली महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। अनियमित दिनचर्या, अनहेल्दी डाइट, देर से सोना-जागना, फिजिकली फिट ना रहना, एक्सरसाइज ना करना और आनुवांशिक कारणों से भी पीसीओएस ट्रिगर होती है।

प्रमुख लक्षण (Symptoms)

टीनएज गर्ल्स: इररेग्युलर पीरियड्स, ब्लीडिंग फ्लो कम होना, वजन का बढ़ना, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उग आना या हर्सुटिज्म डिजीज (पुरुषों की तरह चेहरे, सीने में बाल उग आना), सिर के बाल झड़ना, गर्दन का रंग काला पड़ना, चेहरे और पीठ पर बहुत ज्यादा मुंहासे, मूड स्विंग होना, डिप्रेशन होना।

यंग वूमेन : कंसीव करने और प्रेग्नेंसी में दिक्कत होना, इनफर्टिलिटी।

मिडएज वूमेन: 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण, डिप्रेशन।

रिस्क फैक्टर

समुचित उपचार ना किए जाने पर पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के शरीर में इंसुलिन लेवल बढ़ जाता है। इसे हाइपर इंसुलिमिया या इंसुलिन रेसिस्टेंस भी कहा जाता है। शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ने से इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।

डायग्नोसिस

इस डिजीज का पता लगाने के लिए डॉक्टर फिजिकल चेकअप करते हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर, बॉडी मास इंडेक्स की जांच की जाती है। चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों और पिंपल्स की जांच भी की जाती है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड से ओवरी और यूटरस की लाइनिंग पर सिस्ट की जांच की जाती है। पीसीओएस की जांच के लिए ब्लड टेस्ट भी किया जाता है, जिससे शरीर मे मौजूद हार्मोन लेवल का पता चलता है। जरूरी हो तो सोनोग्राफी भी कराई जा सकती है।

कब जाना चाहिए डॉक्टर के पास

टीनएज (Teenage) में लड़कियों को जब पीरियड्स (Periods) शुरू होते हैं, तब 2-3 साल तक पीरियड्स अनियमित आते हैं। 15-16 साल तक की लड़कियों को इस संबंध में कोई जांच कराने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन अगर मोटापा तेजी से बढ़ने लगे, चेहरे पर पिंपल्स या अनचाहे बाल आने लगें तो सतर्क होने की जरूरत है। ऐसा पीसीओएस (PCOS) की वजह से हो सकता है, इसलिए जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

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