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जानिए कनेर के फूल के औषधीय लाभ, कुष्ठ रोग में भी है कारगर

कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टेबलेट के बराबर असर करता है।

जानिए कनेर के फूल के औषधीय लाभ, कुष्ठ रोग में भी है कारगर

कनेर के पेड़ आसानी से बहुतायत में कहीं भी मिल जाते हैं। इनकी चार प्रजातियां सफेद, पीला, लाल और गुलाबी फूलों वाली होती हैं। जिनमें पीले और सफेद कनेर का औषधीय उपयोग अधिक होता है।

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कनेर के फूल खासकर गर्मियों में ही खिलते हैं। कनेर के पेड़ को कुरेदने या खरोचने से बहुतायत में दूध निकलता है। इसकी फलियां चपटी गोलाकार पांच से छ: इंच वाली होती हैं।

कनेर का जहर डाइगाक्सीन की तरह होता है जो हदय की धड़कन को कम करता है। कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टेबलेट के बराबर असर करता है। इससे इस पौधे के उपयोग और असर के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इनके सभी अवयवों का हम औषधीय लाभ लेते हैं इस तरह-

नेत्र रोग में
कनेर के पौधे की जड़, सौंफ और करंज के पत्ते को पीसकर पानी में मिलाकर आंखों में लेपन करने से संबंधित रोगों में लाभ होता है।
सिर दर्द में
कनेर के फूल और आंंवले को पीस कर ठंडे पानी के साथ मिलाकर सिर में लगाने से दर्द में राहत मिलती है।
अर्श रोग में
कनेर की जड़ को पीसकर ठंंडे पानी के साथ लगाने से अर्श रोगों में लाभ होता है।
उबटन के रूप में
सफेद कनेर के फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से सुंदरता बढ़ती है।
दर्द में राहत हेतु
कनेर के ताजा फूल 50 ग्राम, 200 ग्राम जैतून तेल और 100 ग्राम के अन्य तेल के मिश्रण को दर्द वाले नसों पर मालिश करने से लाभ होता है। इसी तरह काला धतूर, सफेद कनेर की जड़ को पीसकर तेल में मिलाकर पक्षाघात के रोगियों में लगाने से लाभ होता है। इसी तरह यह चर्म रोग, कुष्ठ रोग, खुजली, सर्प दंश, कृमि रोग और कफ वात नाशक होती है।
चिकित्सकीय सलाह
कनेर के किसी भी अवयव को अपने अनुसार रोगों में लाभ के लिए उपयोग में नहीं लाना चाहिए क्योंकि इसकी कम मात्रा में अमृत और अधिक मात्रा में उपयोग करने से जहर के गुण प्रदर्शित होती हैं। इसलिए उपयोग के पहले डाक्टर की सलाह अवश्य लें।
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