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ये है भारतीय नारी के 32 श्रृंगार, जानें इनकी विशेषताएं

नारी सुंदरता की अगर हम बात करते है तो सबसे पहले जो एक नाम आता है वह रानी पद्मावती का है। रानी पद्मावती को विरांगना के साथ-साथ नारी सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।

ये है भारतीय नारी के 32 श्रृंगार, जानें इनकी विशेषताएं

नारी सुंदरता की अगर हम बात करते है तो सबसे पहले जो एक नाम आता है वह रानी पद्मावती का है। रानी पद्मावती को विरांगना के साथ-साथ नारी सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। बताया जाता है कि वह इतनी सुंदर थी जो उन्हें एक बार देखता था वह उनकी सुंदरता का कायल हो जाता था, इसलिए ही आज हम आपको नारी श्रृंगार के 32 विशेषताओं के बारे में बताने जा रहे है...

बिंदी- कहते है माते के बीचों बीच लगाई जाने वाली बिंदी परिवार की समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

सिंदूर- मांग में सिंदूर महिलाएं इसलिए लगाती है क्योंकि यह सुहागिन का प्रतीक होता है।

काजल- आँखों का श्रृंगार काजल के बिना अधूरा माना जाता है और काजल दुल्हन और उसके परिवार के सदस्य को बुरी नजर से भी बचाता है।

लिपस्टिक- महिलाओं के चेहरे को सबसे ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए लिपस्टिक का प्रयोग किया जाता है।

मेहंदी- मेहंदी को पति के प्यार से जोड़ कर देखा जाता है। कहते है जितनी गाढ़ी मेहंदी रचती है पति प्यार भी उतना ज्यादा ही करता है।

नेल पोलिश- नेल पोलिश को महिलाएं अपने नखूनों पर लगाती है, जिससे की उनके नाखून देखने में सुंदर लगते है।

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मांग टीका- मांग टीके को महिलाएं सर के ठीक बीचों-बीच लगाती है ताकि वह हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले।

नथ- सुहागिन महिला के नथ इसलिए पहनती है ताकि उनके पति का स्वास्थ्य ठीक रहे और उन्हें धन की वृद्धि हो।

ईयरिंग्स- कानों में ईयरिंग्स पहनने के पीछे यह मान्यता ये है कि शादी के बाद महलाएं अपने पति और ससुराल वालों की बुराई करने और सुनने से दूर रहे।

मंगलसूत्र- पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं मंगलसूत्र को पहनती है।

बाजूबंद- महिलाएं के बाजूबंद पहनने के पीछे यह मान्यता है कि उनके परिवार के धन की रक्षा होती और बुराई पर अच्छाई की जीत होती है।

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सोने का कंगन- कंगन को सौभाग्यवती बने रहने के लिए पहने जाते है।

चूड़ियों- सुहागन महिलाओं सुहाग के प्रतीक के लिए हमेशा चूड़ियां पहनती है।

अंगूठी- शादी होने से पहले वर-वधू के बीच प्यार पनपने लगे इसलिए सगाई कराई जाती है और अंगूठी को प्यार और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है।

कमरबंद- कमरबंद सुहागन को यह बताता है कि वह अब अपने घर की स्वामिनी है।

बिछुआ- बिछुआ पहनने से महिलाओं के शादी-शुदा होने का प्रतीक हो जाता है।

पायल- पैरों में पहनी जाने वाली पायल घर में सुमधुर ध्वनि बनी रहे और महिलाओं के आने की आहट होने के लिए भी पहनी जाती है।

लौंग- शादी के बाद महिलाओं की नाक को कभी सुनी नहीं रहने देते इसलिए ही वह हमेशा नाक में लौंग पहन कर रखती है।

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साड़ी- नारी श्रृंगार में सबसे अहम साड़ी को माना जाता है।

गजरा- फूलों का गजरे की महज जीवनसाथी को हमेशा आपसे जोड़े रखती है।

हार- गले में पहने जाने वाला हार महिला के गले के कई हिस्सों को स्वस्थ रखने में काम आता है।

चूड़ा- चूड़ा शादी शुदा होने का प्रतीक माना जाता है, इसके साथ प्रजनन और समृद्धि का संकेत भी होता है।

बोरला- राजस्थान में बोरला नाम का एक आभूषण जो कि सिर के ठीक बीचोंबीच इसलिए पहना जाता है कि ताकि दुल्हन शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले।

कानों के कुण्डल- कानों में कुंडल पहनने से महिलाए सुंदर तो दिखती ही है, इससे उन्हें मासिक धर्म से सम्बंधित परेशानियों में भी लाभ मिलाता है।

परांदा- परांदा को जब आधे वालों की चोटी गूंध जाती है तब लगाया जाता है।

सेलड़ी- चांदी की चोटिया को महिलाएं चोटी बना कर उसके ऊपर लगाते है।

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हस्ली- हस्ली सोने से बनी हुई होती है जिसका आकार एक पहिए की तरह होता है।

हथफूल- हथफूल के पांच अंगूठी और एक ब्रेसलेट को मिला कर बनता है, जिसे पहनने के बाद महिलाओं के साथ बिलकुल फूल की तरह लगते है।

ब्रेसलेट- ब्रेसलेट एक बहुत ही प्यारा से चैन या फिर कड़े का बना हुआ होता है, इसे महिलाएं रोज में भी आसानी से पहन लेती है।

अंगूठे- पैर के अंगूठे में पहने जाते है लेकिन यह चुटकियों की तरह नहीं होते

आलता- महिलाएं पैरों में आलता इसलिए लगाती है क्योंकि इससे ठंडक मिलती है जिससे तनाव कम हो जाता है।

माथापट्टी- माथापट्टी महिलाओं के एक कान से शुरू हो कर दूसरे कान पर खत्म होता है जो कि बिच में आपकी हेयरलाइन को कवर करता है।

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