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बदलता मौसम दे सकता है आपको हार्ट अटैक, रहें सावधान

सर्दियों के मौसम में दिल की बीमारियां 35 फीसदी तक बढ़ जाती हैं ।

बदलता मौसम दे सकता है आपको हार्ट अटैक, रहें सावधान
नई दिल्ली : सर्दियां अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आती हैं, जैसे कि सामान्य फ्लू, खांसी, डिप्रेशन और कोल्ड। एक और समस्या जो होती है, वह इससे भी गंभीर है हार्ट अटैक। शोध बताते हैं कि सर्दियों में हार्ट अटैक और दिल की धड़कनों संबंधी बीमारियां अधिक खतरनाक रूप में सामने आती हैं। इसकी वजह है शरीर में अल्फा एक्टिविटी रिसेप्टर का बढ़ना और गर्मियों के मुकाबले ब्लड प्रेशर में पांच एमएम एचजी तक बढ़ोत्तरी। इसके अलावा नियमित व्यायाम और शारीरिक सक्रियता में कमी सीधे तौर पर दिल की बीमारियों से संबंधित हैं।
ऐसा अनुमान है कि सर्दियों के मौसम में दिल की बीमारियां 35 फीसदी तक बढ़ जाती हैं और सुबह के समय हार्ट अटैक के मामले ज्यादा होते हैं। हार्ट फेलियर और दिल के इलेक्ट्रिक ब्लॉकेज होना इस समय बेहद आम बात हो जाती है। इन सारी स्थितियों में स्टेंट, बाईपास और पेसमेकर इंप्लांट की जरूरतें बढ़ रही हैं। इस तरह की बढ़ोत्तरी डायबिटीज पीड़ितों और ऐस्पिरिन प्रॉफिलेक्सिस ले रहे लोगों में नहीं देखी जाती है। डॉक्टर के अनुसार पेसमेकर एक ऐसा डिवाइस है, जिसमें इलेक्ट्रिकल इंपल्स का इस्तेमाल होता है और यह दिल की मांसपेशियों में इलेक्ट्रॉड्स के जरिए अपना असर दिखाता है और दिल की धड़कनों को नियमित फीसदी ज्यादा होता है।
दिल की धड़कनों संबंधी समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाला यह सबसे आम इलाज है। अगर दिल ही सेहतमंद नहीं रहेगा तो शरीर किसी भी काम को करने लायक नहीं रह जाता है। जरुरी हो जाता है कि अपनी सेहत का ख्याल रखा जाए। जिससे आप अपनी रोज-मर्रा की जिंदगी का आंनद ले सकें। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.के.के.अग्रवाल ने कहा कि, पेसमेकर का प्राथमिक कार्य होता है दिल की धड़कनों के स्तर को नियमित रखना, ऐसा या तो इसलिए होता है क्योंकि प्राकृतिक पेसमेकर सही गति से न चल रहा हो अथवा दिल के इलेक्ट्रिकल कंडक्शन सिस्टम में कोई रूकावट आने पर होता है।
ऐसे मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है, जिन्हें पेसमेकर की जरूरत है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में हर साल 1.5 लाख लोगों को पेसमेकर की जरूरत होती है, जबकि इंप्लांट सिर्फ 36,322 ही होते हैं। उन्होंने बताया कि पेसमेकर को हर 5 से 10 साल बाद बदलना पड़ता है, इसकी लाइफ इसकी बनावट और इस्तेमाल पर निर्भर करती है। एक बार पेसमेकर इंप्लांट हो जाने के बाद आमतौर पर मरीज की एमआरआई नहीं की जा सकती है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, लक्षण जो देते हैं सकेंत हार्ट अटैक के -
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