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Research : नवजात में भाषा का ज्ञान विकसित करने के लिए इस वक्त करें बात

आपने अक्सर बच्चों को आपकी नकल करते हुए जरुर देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका नवजात शिशु के साथ बात करना, आंखों का मिलाना और अलग-अलग तरह से आवाज निकालना उनके मानसिक विकास के साथ भाषा विकसित करने में बहुत मददगार साबित होता है। एक शोध के मुताबिक, 19 महीने का शिशु, 100 शब्दों को समझने की समझ विकसित कर लेता है। ऐसे में आइए जानते हैं शिशु विकास से संबंधी अन्य जानकारियां...

नवजात से बात करना है फायदेमंद, भाषा के साथ मानसिक विकास होगा तेज, शोध का खुलासाTalk To Newborn Baby At This Time For Develop Language Knowledge According Research

इंग्लैंड के शेफील्ड विश्वविद्यालय की एक शोध के मुताबिक, आपके बातचीत करने और बोलने के तरीके से नवजात शिशु के मस्तिष्क और भाषा ज्ञान का विकास में 6 महीने से 1 साल के अंतराल में लगभग 80 फीसदी तक हो जाता है। ऐसे में अगर आप भी अपने नवजात शिशु के मानसिक और भाषा विकास को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो उसके साथ अपनी बातों को शेयर करें, खेलें और अलग-अलग हाव-भाव से अपनी बातों को समझाने की कोशिश करें। आइए जानते हैं शोध की अन्य अहम बातें...




मानसिक विकास में मिलती है मदद

इंग्लैंड की शेफील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक, 11 से 12 महीने के शिशु की देखभाल के दौरान की जाने वाली बातों का अध्ययन करने पर यह पाया गया कि शिशु अपनी देखभाल करने वालों से खुद बातचीत यानि संवाद कायम करने के लिए कोशिश करते हैं। वो ऐसा पहला शब्द सीखने से पहले ही अपने व्यवहार के माध्यम से करने लगते हैं। यह उनके मानसिक विकास को दर्शाता है और शब्दों को सीखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

भाषा का होता है विकास

शोधकर्ता डा. डोनेल्लन ने शोध के दौरान शिशु की देखभाल करने वाले वीडियों का आकलन करने पर पाया कि शिशु के व्यवहार में तेजी से आए बदलावों को नोटिस किया और पाया कि शिशु के साथ संवाद करने पर वो स्वयं भी भाषा, आवाज और अपने व्यवहार द्धारा अपनी बात कहने की कोशिश करता है। शोध के अनुसार, 19 महीने के सामान्य शिशु औसतन 100 शब्द समझ सकते हैं। वहीं, जिन शिशुओं के साथ संवाद यानि समय-समय पर बातचीत की गई वो 130 शब्द तक समझ पा रहे थे।




कब करें शिुशु से बात

अब आप सोच रहे होगें कि शिशु के साथ बातचीत करने का कौन सा समय सबसे उपयुक्त रहेगा, तो आपको बता दें कि आप अपने शिशु को दूध पिलाते या खाना खिलाते समय, घूमते हुए, अपना घर का कोई काम करते हुए भी बातचीत या संवाद स्थापित कर सकते हैं। आप बच्चे के मानसिक और भाषा ज्ञान को बेहतर बनाने के लिए खेल और संगीत का सहारा भी ले सकते हैं। क्योंकि बच्चे संगीत की बार-बार सुनी गई धुन पर रिएक्ट करते हैं।

बच्चे और अभिभावक करें साथ प्रयास

अगर आपको लगता है कि बच्चे आपकी बातों को समझ नहीं पायेगें, तो आप गलत हैं, वो आपकी हर बात, आवाज, इशारे और आपके व्यवहार पर प्रतिक्रिया करते हैं। शोध के मुताबिक, शिशु और उनकी देखभाल करने वाले यानि पेरेंट्स के लगातार प्रयास से न सिर्फ शिशु में चीजों को समझने की शक्ति बढ़ती है बल्कि वो इसके जरिए भाषा को भी जल्दी सीखते हैं।

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