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कैंसर से कम नहीं प्रदूषण, जानिए इससे होने वाली बीमारियां और बचाव के तरीके

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण में हुए इजाफे से लोगों को सांस लेने और आंखों में जलन की समस्या हो रहा है, प्रदूषण श्वांस नली या आंखों को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी शिकार बना सकता है। इसलिए आज हम आपको प्रदूषण के प्रकार, प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और उसके उपचार बता रहे हैं।

प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और बचाव के तरीकेप्रदूषण से होने वाली बीमारियां और बचाव के तरीके

दिल्ली में धुंध की चादर के साथ शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी के प्रदूषण स्तर में लगभग 50 अंकों की वृद्धि हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने कहा कि एक्यूआई समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 459 पर पहुंच गया। बढ़ता प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए समय से पहले मौत के प्रमुख कारणों में से एक बनता जा रहा है। एक शोध के मुताबिक हर साल 20 मिलियन यानि 40 फीसदी से भी ज्यादा मौतें सिर्फ प्रदूषण से होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं प्रदूषण से होने वाली बीमारियों और उससे बचने के उपाय (Pollution Diseases and Prevention Tips)...

प्रदूषण के प्रकार (Types Of Pollution)

1. वायु प्रदूषण

2. जल प्रदूषण

3. ध्वनि प्रदूषण

4. मृदा प्रदूषण


वायु प्रदूषण (Air Pollution)

हवा में मौजूद जहरीली गैसों के मिश्रण को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां ...

अस्थमा (Asthma)

अस्थमा धूल,धुंए और हवा में मौजूद जहरीली गैसों के संपर्क में आने पर दम घुटने या सांस लेने में होने वाली परेशानी को अस्थमा कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को सीने में जकड़न और दर्द की शिकायत के साथ सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।

फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer)

लगातार जहरीली गैसों के संपर्क में रहने से पल्मोनरी यानि फेफड़े का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में मौजूद ऊतकों में अनियंत्रित गति से कोशिश वृद्धि होने लगती है, और एक ट्यूमर बन जाती है। धीरे-धीरे इसका असर फेफड़ों के अलावा पूरे शरीर में फैल जाता है। इसके लक्षणों की बात करें तो खांसी, वजन में कमी होना, सांस लेने में तकलीफ होना और सीने में दर्द होना प्रमुख हैं। फेफड़े के कैंसर को कार्सिनोमा और लंग कैंसर भी कहा जाता है।

दिल संबंधी समस्याएं (Heart Disease)

बढ़ते प्रदूषण और जहरीली गैसों के ज्यादा संपर्क में रहने से शरीर में धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे दिल को रक्त प्रवाह को सामान्य बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे दिल की बीमारी यानि स्ट्रोक और अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है।

जल प्रदूषण (Water Pollution)

पानी में प्लास्टिक, धूल, राख और अन्य हानिकारकों तत्वों की मौजदूगी से जल प्रदूषण बढ़ता है। जल प्रदूषण के कारण होने वाले रोग...


टाइफॉयड (Typhoid)

टाइफॉयड प्रदूषित और गंदे पानी का सेवन करने से होने वाली एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से तेजी से फैलती है।

दस्त या फूड प्वॉयजनिंग ( Diarrhea or Food Poisoning)

आमतौर पर दूषित पानी पीने और दूषित खाना खाने से होने वाली बीमारी है, इसमें पेट में सूजन के साथ इंफेक्शन होने का खतरा होता रहता है। जिससे पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है।

कैंसर (Cancer)

ज्यादा क्लोरीनयुक्त पानी का सेवन करने से भी आप बीमार पड़ सकते हैं, इससे आपको लीवर इंफेक्शन और लीवर में कैंसर होने की संभावना उत्पन्न हो सकती है।

मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

मृदा प्रदूषण यानि मिट्टी से होने वाला प्रदूषण, जब हम मिट्टी के संपर्क में आते हैं, तो इससे हमारे सीसा, आरसैनिक और अन्य हानिकारक रसायन शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। लगातार इनके संपर्क में रहने पर मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर पड़ता है।

पेट में कीड़े होना (Stomach Bug)

मिट्टी में मौजूद रसायन से पेट में कीड़े होने की समस्या उत्पन्न होती है। जिससे बच्चों के पेट में दर्द, शारीरिक कमजोरी होने लगती है। ये समस्या बड़े लोगों को भी हो सकती है।

लीवर और किडनी की बीमारी (Liver And Kidney Disease)

लंबे समय तक जहरीले रसायनों वाली प्रदूषित मिट्टी के संपर्क में रहने से लीवर और किडनी की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाती है।

ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

तेज आवाज में गाने और हार्न बजाना या सुनना ध्वनि प्रदूषण के अंतर्गत आता है। लगातार तेज आवाज में सुनने से कान के परदे फटने और अस्थायी या स्थायी रुप से बहरापन हो सकता है। इस बीमारी का पहचानना बेहद मुश्किल होता है।



प्रदूषण से बचाव के तरीके (Pollution Precaution Tips)

वायु प्रदूषण से बचने के तरीके ( Air Pollution Pollution Precaution Tips)

1. ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं

2. आसपास धूल- मिट्टी वाली जगह पर पानी का छिड़काव करें

3. घर से बाहर निकलने पर हाई क्वॉलिटी का मास्क पहनें

4. अस्थमा पेशेंट्स अपना इनहेलर हमेशा साथ रखें

5. दवाओं का सेवन समय से करें

जल प्रदूषण से बचने के तरीके (Water Pollution Precaution Tips)

1. पानी को हमेशा उबालकर पीयें

2. तांबे के बर्तन के पानी का सेवन करें

3. अधिक क्लोरीनयुक्त पानी का सेवन करने से बचें

4. घर से निकलते समय पानी अपनी वॉटर बॉटल साथ रखें


ध्वनि प्रदूषण से बचने के तरीके (Noise Pollution Precaution Tips)

1. धीमी आवाज में गाने सुनना

2. कम आवाज में हार्न बजाना

मृदा प्रदूषण से बचने के तरीके (Soil Pollution Precaution Tips)

1. मिट्टी में काम करते समय हाथों और पैरों को ग्लव्स और प्लास्टिक बूटस से कवर करें

2. मिट्टी में कैमिकल युक्त खाद डालने से बचें

3. पौधों के लिए हमेशा ऑर्नेगिनक खाद का इस्तेमाल करें

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