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Muli Ke Fayde : पीलिया, बवासीर का रामबाण इलाज है मूली, जानिए मूली के फायदे

Muli Ke Fayde / मूली के फायदे : आपने भी अक्सर बचपन में स्कूल से आते समय मसाले और नींबू वाली मूली का स्वाद जरुर चखा होगा। इसके अलावा घर में मूली का आचार भी खाया होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में मूली क्यों खाई जाती है, अगर नहीं तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं मूली के फायदे और उससे जुड़ी अन्य जानकारियां...

Muli Ke Fayde : पीलिया, बवासीर का रामबाण इलाज है मूली, जानिए मुली के फायदेमूली के फायदे

Muli Ke Fayde : अगर आपको भी सर्दी की गुनगुनी धूप में मूली खाना पसंद है, तो आपको बता दें कि सफेद रंग की पतली और मोटी मूली में पोटेशियम, कैल्शियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन, मिनरल्स, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन बी -6 , जस्ता, फोलेट आदि शरीर के लिए जरुरी पौषक तत्व पाए जाते हैं। जिससे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ पीलिया जैसी गंभीर बीमारी में रामबाण साबित होती है। मूली की तासीर ठंडी होती है, इसलिए रात के समय इसका सेवन करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं सर्दियों में मूली खाना क्यों होता है फायदेमंद...

मूली क्या है (What is Radish)

मूली एक जड़ वाली तीखी स्वाद की एक सब्जी होती है। मूली का वैज्ञानिक नाम रापानस सैटियस है। मूली के पत्तों, बीजों और उसके फल का भी अलग-अलग चीजों में उपयोग किया जाता है। आमतौर पर मूली को कच्चा, पकाकर या अचार के रुप में खाया जाता है। मूली मीठे और तीखे स्वाद में पाई जाती है। मूली सफेद रंग के अलावा लाल, बैंगनी या काला रंग की भी होती है, जो लंबी, गोल और बेलनाकार में होती हैं। मूली मुख्य रुप से एशिया में उगाई जाती है जबकि दुनिया के कुछ हिस्सों में इसे डायकॉन के रुप में जाना जाता है।




मूली का उपयोग (Use Radish)

मूली का अक्सर उपयोग सलाद, खाना बनाने, अचार बनाने और घरेलू दवा के रुप में किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी मूली को स्वस्थ रहने के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है, इसलिए आयुर्वेद में मूली के गुणों के साथ इसके सेवन से पीलिया और अन्य गंभीर रोगों को ठीक करने के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। मूली के बीजों का तेल उपयोग भी सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए उपयोगी साबित होता है।

मूली के प्रकार (Types of Radish)

पूसा चेतकी

जापानी व्हाईट

पूसा हिमानी

मूली सेवन का सेवन कब करना चाहिए (When Should Consume Radish)

मूली का सेवन करने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट होता है। इससे पीलिया और पेट संबंधी विकारों को ठीक करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलती है।

मूली की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा धूप में करना चाहिए और रात के समय उपयोग करने से बचना चाहिए, वरना सर्दी और बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है।

मूली के पौषक तत्व (Radish Nutrient Value)

पानी ग्राम 95.27

ऊर्जा kcal 16

प्रोटीन ग्राम 0.68

लिपिड (वसा) ग्राम 0.1

कार्बोहाइड्रेट ग्राम 3.4

फाइबर, आहार संबंधी ग्राम 1.6

शक्कर, कुल ग्राम 1 .6

कैल्शियम, सीए मिलीग्राम 25

लोहा, Fe मिलीग्राम 3.4

मैग्नीशियम, मिलीग्राम 10

फास्फोरस, पी मिलीग्राम 20

पोटेशियम, मिलीग्राम 233

सोडियम, ना मिलीग्राम 39

जिंक, Zn मिलीग्राम 0.28

विटामिन सी, एस्कॉर्बिक एसिड मिलीग्राम 14.8

राइबोफ्लेविन 0.04

नियासिन मिलीग्राम 0.25

विटामिन बी -6 मिलीग्राम 0.07

फोलेट, डीएफई मिलीग्राम 25

विटामिन बी -मिलीग्राम 12

विटामिन ए, आरएई

विटामिन ए, आईयू 7

विटामिन डी (डी 2 + डी 3) मिलीग्राम

विटामिन डी [आईयू]

विटामिन के (फ़ाइलोक्विनोन) ,1.3

फैटी एसिड, कुल संतृप्त ग्राम 0.03

फैटी एसिड, कुल मोनोअनसैचुरेटेड 0.05




मूली के फायदे (Radish Benefits)

1. लीवर और पित्ताशय के लिए फायदेमंद (Protects Liver & Gallbladder)

मूली और मूली का रस लीवर और पित्ताशय संबंधी रोगों में बेहद कारगर माने जाते हैं। साल 2012 में हुए एक शोध के मुताबिक, सफेद मूली के रस में हेपेटोटॉक्सिसिटी से बचाने की क्षमता पाई जाती है। इसके अलावा पित्त की थैली में होने वाली पथरी को खत्म करने ट्राइग्लिसराइड्स को भी कम करके शरीर में एचडीएल यानि अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। मेक्सिको में आमतौर पर काली मूली के रस का उपयोग किया जाता है।

2. शरीर को हाईड्रेट रखती है (Keeps you Hydrated)

मूली में पानी की मात्रा सबसे अधिक होती है। ऐसे में अगर आप नियमित रुप से 1 मूली का सेवन करते हैं, तो आपके शरीर में नमी बरकरार रहती है, जिससे त्वचा रुखी और रफ नहीं लगती है। साथ ही पेट से जुड़ी बीमारियों यानि कब्ज, अपच की समस्या को दूर करके पाचन तंत्र को मजबूत करती है।

3. कीड़े के काटने पर असरदार (Effective Insect Bites)

मूली का रस बीमारियों के अलावा कीड़ों के काटने पर भी बेहद कारगर होता है। कीड़े के काटने या दंश मारने वाली जगह पर मूली का रस लगाया जाए, तो इससे दर्द और सूजन कोकम किया जा सकता है।

4. पीलिया से राहत (Radish For Jaundice)

मूली का सेवन पीलिया में करना बेहद फायदेमंद होता है। ये शरीर में एक डिटॉक्सिफायर के रुप में काम करती है और शरीर के सभी विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट पदार्थों को निकालकर साफ रक्त को साफ यानि शुद्ध करती है और रक्त में फ्रेश ऑक्सीजन को बढ़ाने में मदद करती है। पीलिया में आमतौर पर काली मूली का उपयोग किया जाता है, इसके साथ इसके पत्ते का भी उपयोगी होते हैं।

5. स्किन केयर (Skin Care)

मूली का सेवन करना स्किन केयर के लिए भी बहुत लाभदायक होता है। क्योंकि इसमें पानी के अलावा विटामिन सी, जिंक और विटामिन-बी 6 जैसे पौषक तत्व उच्च मात्रा में पाए जाते हैं। मूली में की पानी की अधिकता पाई जाती है, जिससे शरीर की नमी बरकरार रहती है। जिससे त्वचा की ड्राईनेस,चकत्ते और दरारें जैसी त्वचा की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा मूली में एंटी बैक्टीरियल तत्व और नियासिन पाया जाता है, जिससे मूली का रस एक अच्छे क्लींजर के रुप में काम करता है।

6. डायबिटीज में लाभदायक (Diabetes)

साल 2017 के एक जर्नल न्यूट्रीशन में छपी खबर के मुताबिक, मूली के रस का सेवन करने से ब्लड शुगर सामान्य रुप से कम होती है। इसका मतलब ये हुआ कि डायबिटीज में मूली का भोजन में या रस के रुप मे सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है।

7. हाई ब्लड प्रेशर में करती है कमाल (Lowers Blood Pressure)

मूली में पोटेशियम उच्च मात्रा में पाया जाता है। ऐसे में नियमित रुप से मूली का सेवन करने से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है और शरीर में रक्त की आपूर्ति को बढ़ावा मिलता है। जिससे ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाने में मदद मिलती है।

8. श्वांस संबंधी बीमारी से निजात (Relieves Respiratory Disorders)

मूली का सेवन करने से श्वांस संबंधी बीमारियों से निजात मिलती है। मूली में एंटी बैक्टीरियल तत्व, विटामिन सी और एंटी-कंजेस्टिव तत्व उच्च मात्रा में पाये जाते हैं। जिससे सर्दी , इंफेक्शन, एलर्जी से छुटकारा मिलने के साथ नाक, गले, श्वांसनली और फेफड़ों की जलन, खुजली को शांत करने में मदद मिलती है। इसके अलावा मूली कफ, गले में खराश और साइनस को साफ करने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन मूली का सेवन सुबह और दोपहर में ही करें।

9. बवासीर में लाभदायक (Prevents Piles)

मूली में अत्याधिक मात्रा में पानी पाया जाता है। इसके अलावा फाइबर और कार्बोहाईड्रेट्स जैसे जरुरी पौषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए अगर आपको बवासीर की समस्या है, तो मूली के रस का दिन में 2 बार नमक डालकर सेवन करना फायदेमंद रहेगा। बवासीर के साथ कब्ज और अपच संबंधी पेट के रोगों में भी लाभ मिलता है।

10. यूरिनरी संबंधी रोग (Urinary Disorders)

साल 2012 के एक शोध के मुताबिक, मूली एक प्राकृतिक रुप से मूत्रवर्धक होती है और उसमें एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। ऐसे में अगर आप यूरिनरी संबंधी रोग (पेशाब के दौरान जलन, यूरिनरी इंफेक्शन, लिवर इंफेक्शन) आदि से पीड़ित हैं, तो मूली के रस का दिन में 2 सेवन करें। इससे जलन और इंफेक्शन के साथ सूजन में कमी आती है।




मूली के नुकसान (Radish Side Effects And Precautions)

मूली के फायदे बहुत सारे हैं लेकिन इसका अन्य चीजों की तरह अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ नुकसान भी होते हैं, जिनमें एसिडिटी, पेट में जलन और एलर्जी के रुप में सामने आते हैं। आइए जानते हैं निम्न मूली के साइड इफेक्ट्स :

1. गर्भावस्था और स्तनपान (Pregnancy and Breast Feeding)

गर्भवती महिलाएं या बच्चों को स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को मूली का सेवन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में कोई पर्याप्त जानकारी नहीं हैं, लेकिन हर खाद्य पदार्थों की ही तरह मूली का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

2. मधुमेह (Diabetes):

मूली में प्राकृतिक रुप से ब्लड शुगर को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, ऐसे में अगर आप डायबिटीज के पेशेंट हैं, तो मूली का उपयोग सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह पर ही सेवन करना चाहिए।

3. पित्ताशय की पथरी (Gallstones):

अगर आप गॉलस्टोन यानि पित्ताशय की पथरी से पीड़ित हैं, तो ऐसे में मूली का सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिेए, क्योंकि मूली से शरीर में पित्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पथरी की वजह से पित्त नली अवरुद्ध होने पर अचानक तेज दर्द का खतरा बढ़ सकता है।

4. सर्जरी (Surgery):

मूली का सेवन करने से तेजी से ब्लड शुगर का स्तर कम होता है, जिससे सर्जरी के दौरान और सर्जरी रिकवरी संबंधी परेशानियों की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए सर्जरी से कम से कम 2 सप्ताह पहले मूली का सेवन करना बंद कर देना चाहिए।

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