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टमाटर का जूस दूर करेगा इनफट्रिलिटी न्यूट्रिएंट्स की कमी

इनफर्टिलिटी महिला और पुरुष, दोनों में हो सकती है।

टमाटर का जूस दूर करेगा इनफट्रिलिटी न्यूट्रिएंट्स की कमी
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चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, सभी में बेहतर इनफर्टिलिटी के लिए विटामिन डी, सी, ई, बी कांप्लेक्स, जिंक, सेलेनियम से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मैनेज होता है।

90 प्रतिशत लोगों में इनफर्टिलिटी का करण विटामिन डी की कमी होना पाया गया है। वहीं जापान की एक यूनिर्वसिटी में माइक्रो न्यूट्रिएंट्स पर शोध किए गए।

शोध के दौरान इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे 44 लोगों पर रिसर्च किया गया।

जिन्हें शोध में एक निर्धारित समय के लिए रोज टमाटर का जूस इनफर्टिलिटी न्यूट्रिएंट्स के रूप में दिया गया। जिसके पॉजिटिव रिजल्ट समाने आए हैं।

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यह कहना है दिल्ली से पहुंचे गायनेकोलॉजिस्ट एंड इनफर्टिलिटी स्पेस्लिस्ट डॉ. शिवानी सचदेवा गौर का। वे शनिवार को जेल रोड स्थित एक हॉटल में रायपुर ऑबस्ट्रेटिक्स एंड गायनेकॉलजी सोसायटी द्वारा आयोजित रोल ऑफ माइक्रो न्यूट्रिएंट्स इन मैनेजमेंट ऑफ इनफर्टिलिटी विषय पर बोल रही थीं।

वहीं मुंबई से पहुंची एमबीबीएस, एमडी इन ऑबस्ट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. शुभदा नील ने बताया कि एक मॉरल वैल्यूज वाले बच्चे के जन्म के लिए जरूरी है कि गर्भधारण कर रही मां बच्चे के जन्म तक पूरी तरह से स्ट्रेस फ्री रहे।

इस अवसर पर ऑबस्ट्रेटिक्स एंड गायनेकॉलजी सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. मनोज चेलानी और सचिव डॉ. ज्योति जयसवाल सहित जाने माने विशेषज्ञ डॉक्टर्स मौजूद रहे।

क्या है इनफर्टिलिटी की समस्या-

  1. बच्चा पैदा करने की क्षमता न होना। इनफर्टिलिटी महिला और पुरुष, दोनों में हो सकती है।
  2. आमतौर पर महिलाओं में 20 से 35 साल की उम्र को रिप्रोडक्टिव एज यानी प्रजनन की उम्र माना जाता है।
  3. इसमें भी 23 से 28 साल की उम्र को गर्भधारण के लिहाज से बेहतरीन माना जाता है।
  4. 35 साल की उम्र के बाद गर्भधारण करने पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, मसलन बच्चे का वजन कम होना, बच्चे में जन्मजात बीमारी होना, जल्दी डिलिवरी होना आदि।
  5. शादी के एक-डेढ़ साल तक किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल न करने के बावजूद अगर महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है, तो उसे इनफर्टिलिटी कहा जाता है।
  6. अगर संतान जन्मजात वजहों से नहीं हो सकती, तो उसे स्टरलिटी कहा जाता है।

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न्यू जनरेशन में बढ़ रही इनफर्टिलिटी की समस्या

  1. डॉ. शिवानी ने बताया कि आज के समय में जो कपल्स उनके इंनफर्टिलिटी की प्रॉबल को लेकर आ रहे हैं, उनमें 21 से 25 एज ग्रुप के कपल्स की औसत प्रतिशत 20 होगी।
  2. पहले 35 से अधिक उम्र में यह समस्या देखी जाती थी। पर अब यह न्यू जनरेशन में हावी होती जा रही है।
  3. इसका कारण माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की कमी, इंवायरमेंटल इंफेक्शन, लाइफस्टाइल, सेक्स अवेयरनेस की कमी, रेडियेशन आदि है।
  4. इस इंफर्टिलिटि की समस्या को डॉक्टर्स की सलाह, सही खान पान और जागरूकता से दूर किया जा सकता है।

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