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यायावरों के साथ: ऊफरैंखाळ, शशिखाळ, मौलेखाळ, चित्तौंड़खाळ, लखोरा घाटी

बूंद गिरने लगी थी और कोटद्वार की तरफ जाते हुए बरखा की फुहारें गिरने लगी थी। कोटद्वार पहुंचने तक बरखा रुक गई थी और हम दिल्ली की तरफ आगे बढ़ते जा रहे थे। उस दिन दिल्ली तक बरसात हुई थी।

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