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Ishita Ganguly Special Interview: TV की 'मां काली' ने नहीं किए कभी मां वैष्णो देवी के दर्शन, बताई ये वजह

इन दिनों इशिता गांगुली सीरियल ‘जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की’ में मां काली की भूमिका निभा रही हैं। इस भूमिका की तैयारियां उन्होंने कैसे कीं? वह वैष्णोदेवी की कथा के बारे में कितना जानती हैं? इस सीरियल के अलावा इशिता गांगुली और क्या कर रही हैं, बता रही हैं एक मुलाकात में।

माँ काली की भूमिका निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है : इशिता गांगुलीIt is a Privilege For Me to Play The Role of Goddess Kali: Ishita Ganguly

Ishita Ganguly Interview: इशिता गांगुली ने अपने करियर की शुरुआत तेरह साल की उम्र में बंगाली सिनेमा से की, उसके बाद वह कई बांग्ला टीवी शोज में नजर आई। हिंदी में उनका डेब्यू सीरियल 'शास्त्री सिस्टर्स' था। इसके बाद वह 'तू मेरा हीरो', 'डर सबको लगता है', 'इश्क का रंग सफेद', 'ये है आशिकी', 'पेशवा बाजीराव', 'पृथ्वी वल्लभ', 'लाल इश्क', 'कौन है', 'विक्रम बेताल की रहस्य गाथा', 'श्रीमदभागवत महापुराण' में नजर आईं। अब वह स्टार भारत के नए माइथोलॉजिकल सीरियल 'जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की' में मां काली की भूमिका निभा रही हैं। बातचीत इशिता गांगुली से....

सवाल- आप सीरियल 'श्रीमदभागवत पुराण' में मां पार्वती की भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में एक और माइथोलॉजिकल शो 'जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की' को स्वीकार करने की क्या वजह रही?

जवाब- मैं कोलकाता से हूं, बंगाली हूं। सब जानते हैं कि मां काली हम बंगालियों के जीवन में क्या मायने रखती हैं। ऐसे में जब मुझे पता चला कि सीरियल 'जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की' में मुझे महाकाली का किरदार दिया जा रहा है तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मां काली की भूमिका निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। बचपन से मैंने अपने घर में काली पूजा होते देखी है। दादाजी के घर, नानाजी के घर सब जगह यही माहौल देखा है। अब मैं मुंबई में रह रही हूं, हर साल काली पूजा के खास मौके को मिस करती हूं। ऐसे में जब मुझे मां काली का किरदार निभाने का मौका मिला तो मना करने का सवाल ही नहीं था।

सवाल- मां काली की भूमिका को निभाना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण है ?

जवाब- बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। काली मां का पूरा रूप ही अलग है। चाहे उनकी पोशाक हो, उनका मुकुट हो या आभूषण हों। जब मां काली का रौद्र रूप दिखाना होता है तो वैसे ही भाव अपने अभिनय के जरिए प्रकट करने होते हैं। उसके बाद तुरंत शांत हो जाना होता है। कहने का मतलब है कि इस भूमिका में मुझे अपनी-अपनी अलग भावनाएं, पल-पल बदलनी पड़ती हैं। मुझे यकीन है कि मां काली के आशीर्वाद से मैं यह सब कर पाऊंगी।

सवाल- मां वैष्णोदेवी की कहानी के बारे में पहले आप कितना जानती थीं?

जवाब- सच बताऊं तो कोलकाता में रहते हुए हमने जो कहानियां ज्यादा सुनीं, उनमें दुर्गा और काली की सुनी हैं। इनके अलावा रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद इन सबको ज्यादा सुना। ऐसे में महाकाली का माता वैष्णोदेवी के साथ क्या संबंध है, मां वैष्णोदेवी के अवतार में उनकी क्या भूमिका रही है? ये मुझे नहीं पता था। जब पहली बार सीरियल 'जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की' की स्क्रिप्ट पढ़ी तब पता चला कि मां वैष्णोदेवी असल में मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के अंश से बनी हैं। इस सीरियल के जरिए मुझे अपने धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान का विस्तार करने का भी मौका मिल रहा है। खासतौर पर मां काली, जिनकी पूजा घर में बचपन से मैंने देखी है लेकिन उनके रौद्र रूप के बारे में ही जानती थी। इस सीरियल में लोगों को मां काली का एक और रूप देखने को मिलेगा, वह है ममतामयी मां का। उनके नाम के आगे मां लगता है। इसी मां के रूप को दर्शक सीरियल में देखेंगे। कटरा में जो वैष्णोदेवी का मंदिर बना है, उनके बारे में जानकारी दर्शकों को मिलेगी। किस राजघराने में वैष्णोदेवी का जन्म हुआ, यह सारी कहानी सीरियल में है।

सवाल- मां काली की भूमिका निभाने के लिए आपको किस तरह की तैयारियां करनी पड़ीं?

जवाब- मेरा मानना है कि जब भी आप किसी भूमिका को निभाने जा रहे हों तो आप उस किरदार में ढल जाओ, उस किरदार को महसूस करने लगो, तभी आप उसे पर्दे पर निभा पाएंगे। उसके बाद मुझे नहीं लगता कि आपको किसी और तैयारी की जरूरत है। कई बार होमवर्क की जरूरत होती है, जैसे भाषा की बात करें तो मैंने अच्छी संस्कृतनिष्ठ हिंदी, संस्कृत सीखी।

सवाल- क्या आप कभी वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए गई हैं?

जवाब- अभी तक मुझे मौका नहीं मिला। मैं चाहती हूं कि मुझे बुलावा आ जाए और मैं मां वैष्णोदेवी के दर्शन करूं।

सवाल- आपने अपने करियर में बहुत वैरायटी का काम किया है। क्या आप यह सब प्लानिंग करके करती हैं?

जवाब- मैं मानती हूं कि प्लान करके कुछ नहीं होता, होगा वही जो आपके भाग्य में होगा। लेकिन यह बात भी है कि जब आप कोई काम नहीं कर रहे होते हैं, उस समय आप खुद को ग्रूम करें। जैसे मैं ध्यान लगाती हूं। मैं डांस करती हूं। तलवारबाजी, घुड़सवारी और स्वीमिंग करती हूं। जब भी टाइम मिलता है तो कुछ धार्मिक किताबें पढ़ती हूं, जैसे मैं भगवत गीता पढ़ती हूं। मैं अपनी जिंदगी में खुद को आगे के लिए तैयार करती हूं। जिससे मेरा मन शांत रहे और मेरा ज्ञान भी बढ़ता रहे। जिंदगी में मानसिक शांति बहुत जरूरी है। जिससे आपके अंदर यह सोच आती है कि आप बस कर्म करें, फल जरूर मिलेगा।

सवाल- इन दिनों आप और क्या कर रही हैं?

जवाब- मैंने 'रेस्क्यू' नाम से एक थ्रिलर फिल्म की है। एक और फिल्म की है 'कर्मा' जो कि लंदन फिल्म फेस्टिवल में सेलेक्ट हुई है। यह एक फीचर आर्ट फिल्म है। देखते हैं आगे क्या होता है। अभी तो पूरा फोकस सीरियल 'जग जननी मां वैष्णोदेवी-कहानी माता रानी की' पर है।

प्रस्तुति : रेणु खंतवाल

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