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फिल्म ''कॉमेडी का तड़का'' लेकर लौट रहे छोटे पर्दे के ''शक्तिमान'' मुकेश खन्ना, युवाओं को देंगे सीख

टीवी सीरियल ‘महाभारत’ के पितामह भीष्म और सुपर हीरो शक्तिमान के तौर पर आज भी मुकेश खन्ना याद किए जाते हैं। वह जल्द ही एक कॉमेडी फिल्म ‘कॉमेडी का तड़का’ में भी नजर आएंगे।

फिल्म

टीवी सीरियल ‘महाभारत’ के पितामह भीष्म और सुपर हीरो शक्तिमान के तौर पर आज भी मुकेश खन्ना याद किए जाते हैं। जबकि वह टीवी से पहले फिल्मों में भी एक्टिंग कर चुके थे, अभी भी करते हैं।

लेकिन उनकी पहचान टीवी के इन्हीं दो किरदारों से जुड़ गई। इस बात से मुकेश खन्ना को कोई समस्या नहीं है। वह जल्द ही एक कॉमेडी फिल्म ‘कॉमेडी का तड़का’ में भी नजर आएंगे। मुकेश खन्ना का इरादा शक्तिमान के कैरेक्टर को लेकर भी फिल्म बनाने का है। बातचीत मुकेश खन्ना से।

फिल्म ‘कॉमेडी का तड़का’ के बारे में बताएं, इसमें आपका रोल क्या है?

यह एक कॉमेडी फिल्म है। साथ ही यह मैसेज देने की कोशिश भी की गई है कि हमें लाइफ में बहुत तेज नहीं भागना चाहिए, गैर जिम्मेदारी वाला काम नहीं करना चाहिए। इस फिल्म के राइटर-डायरेक्टर अनीस बारुदवाले हैं, जबकि प्रोड्यूसर संजय सुंताकर हैं।

मेरे अलावा फिल्म में राकेश बेदी, जरीना वहाब, बृजेश हिरजी, देव शर्मा, मिस शिमला रह चुकीं अनुप्रिया कटोच, निशांत तंवर और कुणाल सिंह राजपूत हैं। मैं इस फिल्म में ऐसे पिता के रोल में हूं, जिसकी बेटी उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कर लेती है।

लेकिन बाद में बेटी को लगता है कि पापा ही सही थे। मेरा किरदार, यंगस्टर को रियलाइज करवाता है कि जिंदगी का नाम सिर्फ मस्ती नहीं है, उसे सीरियसली भी लेना चाहिए।

आप समय के साथ बदलती हुई कॉमेडी को कैसे देखते हैं?

देखिए, मैंने ‘हेरा फेरी’ जैसी उम्दा कॉमेडी फिल्म में भी काम किया था। मुझे ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी क्लासिक कॉमेडी फिल्म भी बहुत पसंद है, इसे छह बार देखा है। लेकिन आजकल जिस तरह की कॉमेडी बन रही है, उसमें डबल मीनिंग डायलॉग भी आ गए हैं।

इंद्र कुमार जैसे डायरेक्टर जो ‘राजा’, ‘बेटा’ और ‘दिल’ जैसी फिल्में बनाते हैं अब ‘ग्रैंड मस्ती’ जैसी फिल्में बनाते हैं और हैरत की बात यह है इस तरह की फिल्में हिट भी हो जाती हैं। मुझे लगता है कि ऐसी फिल्में नहीं बननी चाहिए।

डायरेक्टर-प्रोड्यूसर को समझना चाहिए कि फिल्मों का समाज पर गहरा असर पड़ता है। फिल्मों को एक जमाने में समाज का दर्पण समझा जाता था। अरे, भई हम फिल्में, टीवी सीरियल यूथ को मैसेज देने के लिए भी तो बना सकते हैं। ‘शक्तिमान’ बनाकर मैंने बच्चों को पॉजिटिव मैसेज दिए।

आप बहुत कम फिल्में करते हैं, इसकी वजह क्या है?

पहली बात तो यह है कि मैं फिल्मी पार्टियों में नहीं जाता। बड़े डायरेक्टर-प्रोड्यूसर से काम मांगने नहीं जाता। लोग आज मांग-मांग कर और समझौते करके काम हासिल करते हैं, पार्टियों में शराब पीते हैं।

मैं इस इंडस्ट्री में चालीस साल से हूं लेकिन मैंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया। सिगरेट नहीं पी, क्योंकि मुझ पर कोई दबाव नहीं डाल सकता। लोग कहते हैं कि दोस्ती के लिए एक पैग ले लीजिए, लेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं किया।

मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि मैंने अब तक अपनी शर्तों पर काम किया है। मैंने साठ फिल्में कीं, फिर टीवी सीरियल ‘शक्तिमान’ के बाद फिल्में कम हो गईं। लगभग पंद्रह सालों का गैप हो गया।

मैंने टीवी को पचीस साल दे दिए। ‘महाभारत’ से लेकर ‘शक्तिमान’ तक। अब फिर फिल्मों में आना शुरू कर दिया है। फिल्मों के मामले में मैं बहुत चूजी हूं। मेरे पास ‘न’ कहने के बहुत से कारण होते हैं।

सुना है कि आप ‘शक्तिमान’ को बड़े पर्दे पर लाने की प्लानिंग कर रहे हैं?

‘शक्तिमान’ पर जल्द फिल्म बनाने की तैयारी है। भीष्म पितामह और शक्तिमान इन दोनों किरदारों ने मुझे पहचान दी है। मैंने भीष्म पितामह की छवि से बाहर आने के लिए टीवी सीरियल ‘शक्तिमान’ बनाया था। शक्तिमान पंद्रह साल चला।

लोग मुझे असली नाम से ज्यादा शक्तिमान के नाम से जानते और पुकारते हैं। बड़ी खुशी होती है जब किसी एक्टर की एक इमेज बन जाए, उसे उसके किरदार के नाम से जाना जाए तो लगता है कि कुछ हासिल हो गया।

हां, ‘शक्तिमान’ फिर से बनने जा रहा है। मुझे लगता है कि ‘शक्तिमान’ के जरिए बच्चों को मैसेज दिया जा सकता है। ‘शक्तिमान’ में आज के माहौल की बात होगी, लेकिन उसकी आत्मा पहले जैसी ही रहेगी।

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