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कॉमेडियंस की मस्ती भरी दीपावली, जानिए कैसे करते है सेलिब्रेट

परिवार के साथ दीपावली मनाने का मजा ही कुछ और होता है।

कॉमेडियंस की मस्ती भरी दीपावली, जानिए कैसे करते है सेलिब्रेट
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नई दिल्ली. हंसी की फुलझड़ी छुड़ाने वाले कॉमेडियंस याद कर रहे हैं अपने उस दौर की दिवाली को जब उनकी कोई पहचान नहीं थी, तंग हालात में थे लेकिन दिवाली पर भरपूर मस्ती करते थे। इनका कहना है कि आज खूब पैसा होते हुए भी वे वैसी मस्ती-धमाल नहीं मचा पाते। ये कॉमेडियंस अब दिवाली कैसे सेलिब्रेट करते हैं। बता रहे हैं रंगारंग को।

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सुदेश लहरी
दिवाली पर मैं अपने परिवार के पास पंजाब जरूर जाता हूं। सबके साथ दिवाली मनाता हूं। परिवार के साथ दिवाली मनाने का मजा ही कुछ और होता है। मुझे याद हैं वो दिन, जब दिवाली पर हम अपने घर की ही नहीं मोहल्ले की भी सफाई किया करते थे। मैं तो दिवाली के एक हफ्ते पहले से ही त्योहार की तैयारी में जुट जाता था। मुझे दिवाली का त्योहार बहुत पसंद है, क्योंकि यह फुल ऑन एंटरटेनमेंट से भरा होता है। साथ ही इस त्योहार के साथ पॉजिटिव एनर्जी भी हमारे अंदर आती है। मुझ पर तो लक्ष्मी मां की अपार कृपा रही है, लिहाजा हर साल मैं पूरे रीति-रिवाज के साथ लक्ष्मी पूजन करता हूं।
जॉनी लीवर
पहले मैं दिवाली पर खूब धमाल-मस्ती करता था। शायद किसी ने सच ही कहा है, जब पैसे कम होते हैं, तो मजे ज्यादा होते हैं। उस दौरान पैसों की कमी के बावजूद दिवाली मनाने में कोई कमी नहीं रहती थी। दिवाली से पहले बस हम लोग इसी जुगाड़ में रहते थे कि पटाखों का बंदोबस्त कैसे किया जाए? कई बार तो हमने चंदा जमा करके पटाखों का बंदोबस्त किया था। उस दौरान कई बुजुर्ग महिलाएं कहती थीं, क्या बेशर्म लड़के हैं, पटाखे के लिए चंदा जमा कर रहे हैं। हम सारे मोहल्ले के लड़के उसी पैसों से दिल खोल कर दिवाली मना लिया करते थे।
आज सब कुछ है, लेकिन दिवाली पर वो मजा नहीं है। अब मस्ती वाला डिपार्टमेंट मेरे बच्चों के हिस्से चला गया है। मेरी बेटी जैनी बिल्कुल मेरे जैसी है, वह दिवाली के पटाखों के साथ हंसी के फव्वारे भी छोड़ती रहती है। बेटा उससे भी दो कदम आगे है। ओवर एंड ऑल हम परिवार वाले दिवाली मनाते हैं। अपने सभी चाहने वालों को मैं दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं देना चाहता हूं, साथ ही सेफ दिवाली मनाने की सलाह भी।
राजू श्रीवास्तव
सबसे पहले तो मैं सभी पाठकों को दिवाली की ढेरों शुभकामनाएं देना चाहूंगा। मुझे याद है, पहले मैं एक ही गाना गाया करता था-कैसे दिवाली मनाएं हम लाला, अपना तो बारहों महीने दिवाला। आज लक्ष्मी मां की कृपा से पैसों की कोई कमी नहीं है। लिहाजा दिवाली पर मैं पूरी श्रद्धा के साथ गणेश-लक्ष्मी की पूजा करता हूं। उसके बाद ही दिवाली केबाकी कार्यक्रम होते हैं। मेरी बेटी दिवाली का त्योहार बहुत जोश के साथ मनाती है। उसको देखकर मेरा भी पटाखे छुड़ाने का मन हो जाता है। किसी ने सच ही कहा है कि बेटियां घर की रौनक होती हैं।
मुझे आज भी याद है, जब वो चार-पांच साल की थी, तब दिवाली के दौरान उसको तेज बुखार हो गया था फिर भी उसने पटाखे छुड़ाए थे और त्योहार खुशी-खुशी मनाया था। उस दौरान उस छोटी-सी बच्ची ने मुझे सिखाया कि जीवन में त्योहारों का अपना एक महत्व है। उसे किसी भी तरह किसी भी हाल में मनाना चाहिए। क्योंकि त्योहार साल में एक ही बार आता है। इसलिए हमें उसका स्वागत गरमजोशी के साथ करना चाहिए। तब से चाहे जो हो जाए, मैं दिवाली पूरे जोश के साथ मनाता हूं।
भारती सिंह
एक समय था जब हमारे पास बहुत कम पैसे हुआ करते थे और खर्चा उससे भी ज्यादा था। लेकिन उस दौरान भी दिवाली का त्योहार मनाने में कोई कमी नहीं रखती थी। उस वक्त भी फुल ऑन दिवाली का जश्न हम भाई-बहन मिल कर मनाया करते थे। कभी गुल्लक तोड़ते थे, तो कभी पुराना सामान बेच कर पटाखे का बंदोबस्त करते थे। लेकिन जितना भी मिलता था, उसमें खुशी-खुशी दिवाली मना ही लिया करते थे।
आज तो लक्ष्मी मां की अपार कृपा है कि पैसों की कोई कमी नहीं है। लिहाजा दिवाली का जश्न भी जोरदार होता है। दिवाली पर मैं छोटी-सी दिवाली पार्टी करती हूं। जिसमें अपने सभी दोस्तों को बुलाती हूं। हम साथ मिल कर दिवाली मनाते हैं। पटाखे छुड़ाते हैं, देर रात तक दिवाली का जश्न मनाते हैं। दिवाली पर मुझे टेडिशनल तरीके से सजना-संवरना बहुत पसंद है। मैं हर साल दिवाली पर खूब एंज्वॉय करती हूं।
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