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फिल्म ‘मुल्क’ को लेकर तापसी ने किया चौंकाने वाला खुलासा, ‘मॉब लिंचिंग’ पर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने दिया विवादित बयान

तापसी पन्नू और ऋषि कपूर ने मॉब लिंचिंग पर दिया अपना रिएक्शन। साथ ही डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने मॉब लिंचिंग से जुड़े कुछ आंकड़े किए पेश।

फिल्म ‘मुल्क’ को लेकर तापसी ने किया चौंकाने वाला खुलासा, ‘मॉब लिंचिंग’ पर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने दिया विवादित बयान

फिल्म मुल्क की स्टारकास्ट कल प्रमोशन के लिए दिल्ली पहुंची। जहां पर तापसी पन्नू और ऋषि कपूर ने बेबाकी से सामाजिक मुद्दों जैसे मॉब लिंचिंग पर बोला। इसी बीच अनुभव सिन्हा, तापसी पन्नू और ऋषि कपूर से हुई बातचीत से जुड़े अंश-

फिल्म 'मुल्क' एक ही फैमीली पर फोकस रखी गई है और इस फिल्म से आप दर्शकों को क्या मैसेज देना चाहते हैं?

फिल्म में कोई मैसेज देने की कोशिश नहीं की गई है। मैं इतना काबिल व्यक्ति नहीं हूं। मुल्क एक एंटरटेनिंग कोर्ट-रूम ड्रामा है। यह ड्रामा एक ऐसे विषय और मुद्दे के बारे में हैं जो आजकल हमको सुनने और देखने को मिल रहा है।

तापसी आपने अब एक वकील का किरदार निभाया है जो आपके लिए बहुत ही अलग है। आपको इस फिल्म से क्या-क्या सीखने को मिला?

मुझे यह सीखने को मिला कि इतने बड एक्टर्स के सामने मैं अपने आप को थोड़ा संभाल सकुं। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब आपके आस-पास इतने जबरदस्त एक्टर्स हों। आपने मन में एक हाई-एनर्जी होती हैं। शायद मुझे लगता है कि मैं अपने साथ यही सब लेकर जा रही हूं।

आप फिल्म में एक वकील का किरदार निभा रही हैं। ट्रेलर में आप एक परिवार को बचाने के लिए जी-तोड़ कोशिश कर रही हैं। फिल्म में आपके डायलॉग्स लिखे नहीं गए हैं जबकि सारे आपके दिल से निकले हैं?

मैं इस परिवार को बचाने की जी-तोड़ मेहनत ही नहीं कर रही हूं बल्कि मैं भी इसी परिवार का हिस्सा हूं और अपने परिवार को सबसे उपर रखकर मैं अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रही हूं।

आज दर्शक कुछ अलग देखना चाहते हैं। वह फिल्म में कुछ नए कंटेंट को देखने की ख्वाहिश करते हैं?

हमारे यहां एक मल्टीप्लेक्स आडियंस बन गई है। जब मैं मल्टीप्लेक्स आडियंस की बात कर रहा हूं तो वह वो हैं जो 300-400 रूपए की टिकट खरीद कर फिल्म देखना चाहते हैं। मुझे लगता है कि उनका जो सोचना है वह एक रिक्शा वाले से बिल्कुल अलग होगा। ऑटो वाले तो अब भी वही मार-धाड़ वाली फिल्में देखेंगे।
लेकिन अब जो मल्टीप्लेक्स आडियंस हो गई है वह अब नए कंटेंट की तलाश में है। वह चाहते हैं कि फिल्म में अच्छा मुद्दा हो। फिल्म 102 नॉट-ऑउट में कोई कंटेंट नहीं था लेकिन फिर भी फिल्म ने अच्छी कमाई की।

आपने जो सर्व दिखाए क्या वह फिल्म से रिलेट करते हैं या फिर जो फिल्म को लेकर ट्रोलिंग हुई उससे रिलेट करते हैं?

मुजे लगता है कि तीनों इंटररीलेटेड हैं। लोगों ने ट्रेलर देखा उससे ट्रोलिंग हुई उसी के कारण मेरे मन में एक भावना आई जिसके कारण मैने फिल्म के मुद्दे से जुड़े कुछ आंकड़े निकालने शुरु किए। मुझे लगता है कि फिल्म अपने आप में कई सवालों के जन्म देती है।

आज-कल देखा जा रहा है कि कोई भी नेता हो या सेलिब्रिटी वह जल्द ही ट्रोलिंग का शिकार हो जाता है। आप भी उस स्टेज से गुजरे हैं। इन सब चीजों को आप कैसे देखते हैं?

यह कभी-कभी तुम्हें दुखी कर देता है। जब कोई ट्रेलर को लेकर तुम्हें एंटी-हिंदू कहता है। लेकिन कभी-कभी तुम्हे इससे गुरजना होता है कभी अपनी प्रतिक्रिया देनी होती है। हमने ट्रेलर में हिंदुओं के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। यहां तक की हमने ट्रेलर में किसी के भी खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है।
मुझे लगता है कि ट्रोलर्स फिल्म को निशाना नहीं बना रहे हैं बल्कि वह हमें ट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। एक ट्रोलर ने कहा कि आप 'हलाला' पर फिल्म क्यों नहीं बनाते हो। लेकिन लोगों को यह देखना होगा कि इस पर पहले फिल्म बन चुकी है।

बॉलीवुड में यह मुद्दा बार-बार उठा है जिसमें मुस्लिम स्टार्स ने कहा कि हम भारत मे अपने को अन-सेफ महसूस नहीं करते लेकिन क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि उस समुदाय के कुछ लोग ही सफर कर रहे हैं या पिर पूरा ही समुदाय इतना ही खतरे में है कि वह अपने हिंदू दोस्तों के साथ सेफ फील नहीं कर रहा है?

देखिए, हमारा देश बहुत सालों पुराना है। करीब हर समुदाय यहां पर रहकर गए। हिदू, सिख, जैन, मुस्लिम आदि। ऐसा नहीं है कि पूरा समुदाय ही ऐसा फील कर रहा है। मुसलमानों के लिए सबसे कमाल का मुल्क हिंदुस्तान है। लेकिन अब दौर बदल रहा है पहले दंगे होते थे अब लिंचिंग होती है। फिल्म में एक परिवार है जिसके साथ एक घटना होती है लेकिन वह फिर भी अच्छे से जीने की कोशिश करता है।

डायरेक्टर अनुभव सिन्हा द्रारा रिलीज किया गया एक डाटा जो कहता है कि भारत में 9 फीसदी नॉन-मुस्लिम लोग यह सोचते हैं कि जो बीफ खाता है उसको डेथ मिलनी चाहिए। आपने लिंचिंग को लेकर सर्वे जारी किया है। लोकतंत्र में बिना पॉलिटिक्स के कुछ नहीं होता है क्या सिस्टम की चुप्पी इसे बढ़ावा दे रही है या फिर इसके लिए समाज में जिम्मेदार है कौन?

ऐसी घटनाएं पहली बार नहीं हो रही हैं। मुझे लगता है कि यह सब कुछ देश में अलग-अलग शक्लों में हुए हैं। मुझे लगता है कि आज इसको लेकर जो जस्टिफिकेशऩ शुरु हुआ है वह नया है। वहीं तापसी कहती हैं कि मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना।

क्या बॉलीवुड सिस्टम या यूं कहें कि पावर को लेकर अलग-अलग धड़ो में बंटा हुआ है। अगर बात जब सामाजिक मुद्दों की हो रही है?

मैं पूरे बॉलीवुड का नहीं कहुंगी लेकिन मैने जब भी किसी सामाजिक मुद्दों पर बोला है उसको अच्छे से बोला है। बाकी बॉलीवुड का मुझे नहीं पता।
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