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हमें अपने सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए: अमृता पुरी

अमृता ने कहा कि मैं नॉर्मल कैरेक्टर बिलकुल नहीं करूंगी।

हमें अपने सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए: अमृता पुरी
मुंबई. फिल्म हो या टीवी सीरियल, अमृता पुरी ने हमेशा अलग तरह के किरदार निभाए हैं। सोमवार से स्टार प्लस पर शुरू हो रहे सीरियल ‘पीओडब्ल्यू-बंदी युद्ध के’ में भी उनका बहुत अलग तरह का किरदार है। इस सीरियल में अमृता बहुत ही इमोशनल कैरेक्टर प्ले कर रही हैं। सीरियल में युद्ध बंदियों और उनके परिवार के संघर्ष की कहानी दिखाई जाएगी। इस सीरियल और कॅरियर से जुड़ी बातचीत अमृता पुरी से...
आपने फिल्म और टीवी में बहुत कम काम किया है, लेकिन बहुत अलग तरह के रोल किए हैं? सीरियल ‘पीओडब्ल्यू’ में हरलीन कौर के किरदार में क्या खूबी नजर आई?
इस सीरियल की स्टोरी बहुत अलग है। मैंने इस शो का आॅरिजिनल वर्जन देखा है, अब हम भारतीय संस्करण लेकर आ रहे हैं। आज के दौर मेंं यह कहानी बहुत रिलेवेंट है। इस सीरियल में मैं हरलीन नाम की महिला का रोल निभा रही हूं, वह बहुत स्ट्रॉन्ग है। उसकी शादी को सत्तराह साल हो चुके हैं। लेकिन शादी के बाद पहली ही रात को उसके पति सरताज सिंह को अपनी ड्यूटी ज्वाइन करनी पड़ती है, वह बॉर्डर पर चला जाता है। बाद में पता चलता है कि वो मिसिंग है। ऐसे में हरलीन खुद परिवार की जिम्मेदारी उठाने को तैयार होती है। पति के परिवार को अपना मान लेती है। अपने परिवार के लिए कड़ा संघर्ष करती है। हरलीन अपनी परिवार के लिए इमोशनल के साथ-साथ फाइनेंशियल सपोर्ट बन जाती है।
यह रोल काफी अलग है, इसके लिए आपने खुद को कैसे तैयार किया?
मैं ऐसी महिलाओं से मिली तो नहीं, जो इस तरह के हालात से गुजरी हैं। लेकिन डायरेक्टर निखिल अडवाणी ने कहानी और रोल के बारे में बताया। निखिल जी ने बहुत अच्छे से क्लीयर किया। उन्होंने इस रोल को समझने और निभाने में बहुत मदद की। मैं उन महिलाओं की स्थिति को, मानसिक दशा को समझा नहीं सकती, जो ऐसे सोल्जर की पत्नी हैं, जिनके पति वर्षों से गायब हैं। हम उस दौर से गुजरे नहीं होते हैं, तो उनके इमोशन को समझ नहीं सकते। उनके रोज के दर्द को और उनके सैक्रीफाइज का अंदाज लगाना बहुत टफ है। फिर भी मैंने अपनी तरफ से इस इमोशन कैरेक्टर को निभाने की पूरी कोशिश की है।
इस इमोशनल रोल को निभाते हुए कोई यादगार एक्सपीरियंस हुआ हो तो बताएं?
पूरा शो ही बहुत इमोशनल है। बहुत से सींस इमोशन से भरे हुए हैं। मैं चौदह घंटे हरलीन का रोल निभाती हूं, उसे जीती हूं, उसकी हर भावना को गइराई से महसूस करती हूं। यह सब मेरे लिए बहुत ही अनोखा है।
इस शो को फिल्ममेकर निखिल आडवानी बना रहे हैं। वह बहुत अलग तरह के फिल्ममेकर हैं, उनके साथ कैसे एक्सपीरियंस हुए?
निखिल बहुत क्लीयर हैं कि वो क्या चाहते हैं। किसी सीन को स्क्रीन पर उतारना हू-ब-हू निखिल को आता है। वह छोटी-छोटी बातों पर गहराई से ध्यान देते हैं। लेकिन बंदिशें नहीं लगाते हैं, आर्टिस्ट को पूरी आजादी देते हैं। मैंने उनके साथ इस प्रोजेक्ट को करते हुए बहुत एंज्वॉय किया, साथ ही बहुत कुछ सीखा भी है।
हमारी सैनिक देश के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देते हैं, उनकी फैमिली का सैक्रिफाइज भी बहुत बड़ा होता है। इस बारे में आप क्या सोचती हैं?
हमारे सैनिकों ने बहुत बलिदान करते रहे हैं। लेकिन हम उनको और उनके परिवार को भूल जाते हैं। जिनके पति, बेटे और भाई देश के लिए बलिदान देते हैं, ऐसे परिवार पर हर रोज क्या गुजरती है, यह वही जानते हैं। हमें आर्म्ड फोर्सेज और उनके परिवारों के लिए ज्यादा कॉन्शस होना चाहिए, उन्हें सम्मान देना चाहिए।
आप आगे किस तरह के रोल करना चाहती हैं?
इस शो को क्या रेस्पॉन्स मिलता है, उसके हिसाब से आगे टीवी पर प्रोजेक्ट करूंगी। अगर कहानी और कैरेक्टर हटकर हुए, तो मैं फिल्म और टीवी दोनों जगह उन्हें एक्सेप्ट करूंगी। मैं नॉर्मल कैरेक्टर बिलकुल नहीं करूंगी। मैं बस ऐसे ही कैरेक्टर करना चाहती हूं, जिसमें कुछ करके दिखाने को हो।
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