मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज पिछले 72 घंटे से पूरी तरह बदला हुआ है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के एक्टिव होने से प्रदेश के 40 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों की फसलों पर भी भारी पड़ा है।
42 जिलों में बारिश और ओले
पिछले 24 घंटे में प्रदेश के 42 जिलों के करीब 112 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत कई बड़े शहरों में तेज बारिश और ओले गिरे।
धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ा डोंगरी में सबसे ज्यादा करीब पौन इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं बड़वानी, सेंधवा, मुलताई, भोपाल, दमोह और अमरवाड़ा जैसे इलाकों में आधा इंच या उससे ज्यादा बारिश हुई।
कई जिलों में गिरे ओले
आलीराजपुर, झाबुआ, बैतूल, विदिशा, खंडवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह और सिवनी सहित कई जिलों में ओलावृष्टि हुई। तेज हवाओं और ओलों ने खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया।
74 Km/h की रफ्तार से चली आंधी
तेज हवाओं ने हालात और बिगाड़ दिए। कई इलाकों में 70 से 74 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली, जिससे गेहूं, केला, पपीता और संतरे की फसलें बर्बाद हो गईं।
आज इन जिलों में अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को भी पूर्वी मध्य प्रदेश में सिस्टम एक्टिव रहेगा। रीवा, सिंगरौली समेत 14 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है।
क्यों बिगड़ा मौसम?
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, प्रदेश में तीन ट्रफ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक साथ एक्टिव हैं। यही वजह है कि लगातार मौसम में बदलाव और खराब स्थिति बनी हुई है। शनिवार को यह सिस्टम पूर्व की ओर बढ़ेगा, जिससे पूर्वी जिलों में ज्यादा असर देखने को मिलेगा।
किसानों पर भारी पड़ा मौसम
इस खराब मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।









