Delhi Jal Board: दिल्ली में घर बनाने और निर्माण कार्य शुरू करने वाले लोगों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक नीति सुधार पर मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि उपभोक्ता अब पूरा पैसा पहले जमा किए बिना भी NOC ले सकेंगे।
दरअसल उपभोक्ता और डेवलपर्स बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के समय कुल IFC का 25 फीसदी भुगतान करके प्रोविजनल NOC हासिल कर सकेंगे। वहीं बची हुई राशि को बाद में, पानी के कनेक्शन के अंतिम स्वीकृति के समय लागू दरों के मुताबिक समायोजित कर लिया जाएगा। इसे जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में DJB ने एक अंतरिम लेकिन प्रभावी समाधान लागू किया है। इस फैसले से उन लोगों सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जिनके प्रोजेक्ट्स ऊंचे IFC की वजह से रुके हुए थे।
बताया जा रहा है कि बीते कुछ सालों में IFC की गणना प्रणाली में बदलाव, ऑक्यूपेंसी आधारित मॉडल से फ्लोर एरिया आधारित मॉडल में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई मामलों में तो शुल्क 5 से 10 गुना तक बढ़ गया, जिसकी वजह से आम लोगों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। इसके अलावा निर्माण, पुनर्विकास गतिविधियां ठप हो गईं, जिसके चलके कई संपत्ति मालिक NOC हालिस नहीं कर पा रहे थे। NOC न मिलने पर बिल्डिंग अप्रूवल और प्रोजेक्ट्स में लगातार देरी जैसी स्थिति भी देखने को मिल रही थी।
लोग कर रहे थे शिकायत- मंत्री प्रवेश साहिब सिंह
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि, 'हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऊंचा IFC लोगों को अपना घर बनाने से रोक रहा है। यह न तो नागरिकों के लिए उचित था और न ही सिस्टम के लिए प्रभावी। हमने इसे एक व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण से ठीक करने का फैसला किया।'
उन्होंने यह भी कहा कि हम सिस्टम को लोगों के अनुकूल बना रहे हैं, न कि लोगों को सिस्टम के अनुसार संघर्ष करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अब केवल 25 प्रतिशत भुगतान के साथ निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा, शेष राशि का निष्पक्ष समायोजन बाद में किया जाएगा।
प्रवेश साहिब सिंह ने यह भी कहा कि 'यह सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के विजन के अनुरूप है। हमारा उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, बाधाओं को हटाना और नागरिकों, डेवलपर्स को बिना देरी आगे बढ़ने के लिए सशक्त करना है। दिल्ली को एक कुशल और नागरिक-अनुकूल प्रशासन का मॉडल बनाना है।'
फैसले से क्या फायदे होंगे ?
- रुके हुए प्रोजेक्ट्स को तुरंत मंजूरी मिलेगी।
- तेज अप्रूवल और निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
- वित्तीय बोझ में कमी आएगी।
- सिस्टम में पारदर्शिता और लचीलापन आएगा।
- अतिरिक्त राहत के रूप में 200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां आईएफसी से मुक्त रहेंगी
- बड़े प्लॉट्स को भी संशोधित और तर्कसंगत ढांचे का लाभ मिलेगा।










