गुना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिले के उमरी-आरी गांव में ‘समृद्धि केंद्र’ का उद्घाटन किया है। इस केंद्र को ग्रामीण विकास और डिजिटल सेवाओं को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह देश में सीमित स्तर पर शुरू की गई एक पायलट परियोजना है, जिसके तहत पूरे भारत में केवल तीन स्थानों पर ऐसे केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें मध्य प्रदेश का यह गांव भी शामिल है, जबकि अन्य दो केंद्र उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बनाए गए हैं। इस कारण, यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक ही स्थान पर मिलेंगी सभी जरूरी सेवाएं
समृद्धि केंद्र का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक ही स्थान पर कई तरह की डिजिटल और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है। आम तौर पर गांवों में लोगों को बैंकिंग, स्वास्थ्य या सरकारी सेवाओं के लिए शहरों या दूर स्थित कार्यालयों तक जाना पड़ता है। इस केंद्र के माध्यम से कोशिश की गई है कि ग्रामीणों को ऐसी जरूरतों के लिए बार-बार यात्रा न करनी पड़े और अधिकांश काम गांव में ही पूरे हो सकें। यहां ई-बैंकिंग, डाक सेवाएं, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, शिक्षा और डिजिटल लेन-देन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे लोगों का समय और खर्च दोनों कम होंगे।
5 किमी के दायरे के गांवों में मिलेंगी सेवाएं
इस केंद्र की खास बात यह है कि यह केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले आसपास के कई गांवों को भी सेवाएं दी जाएंगी। इसका मतलब है कि आसपास रहने वाले ग्रामीण भी यहां आकर डिजिटल माध्यम से बैंकिंग, स्वास्थ्य परामर्श, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अन्य सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। इस तरह यह केंद्र एक छोटे क्षेत्र के लिए बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्र की तरह काम करेगा। समृद्धि केंद्र में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया गया है।
सिंधिया ने केंद्र की कार्यप्रणाली को समझा
केंद्र में कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम और नेटवर्क आधारित डिजिटल सिस्टम की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एआर यानी ऑगमेंटेड रियलिटी और वीआर यानी वर्चुअल रियलिटी जैसी नई तकनीकों के जरिए जानकारी प्रस्तुत करने की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री सिंधिया ने केंद्र की कार्यप्रणाली को समझा। इसके साथ ही ड्रोन तकनीक के उपयोग से जुड़े पहलुओं को भी देखा, जो भविष्य में कृषि और निगरानी जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं। सरकार की योजना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो समृद्धि केंद्रों की संख्या आगे बढ़ाई जा सकती है।









