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प्रदेश में आयोजित नेशनल लोक अदालत में एक ही दिन में करीब 1.67 लाख मामलों का समाधान किया गया। इस दौरान लगभग 6.28 अरब रुपए से जुड़े विवाद भी आपसी सहमति से निपटाए गए। राज्यभर में 1388 बेंचों ने मिलकर निपटारा किया।

जबलपुर। प्रदेश में आयोजित नेशनल लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान किया गया। शनिवार को राज्यभर में आयोजित इस विशेष न्यायिक पहल के दौरान एक ही दिन में लगभग 1.67 लाख मामलों का निपटारा किया गया। इसके साथ ही करीब 6.28 अरब रुपए से जुड़े दावों का भी समाधान आपसी सहमति के आधार पर किया गया। इस आयोजन को न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लोक अदालत में दो तरह के मामले
इस लोक अदालत में दो तरह के मामलों को शामिल किया गया था। पहला वे मामले जो पहले से अदालतों में लंबित थे और दूसरा वे मामले जो अदालत में जाने से पहले ही आपसी सहमति से सुलझाए जा सकते थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालतों में लंबित लगभग 42 हजार से अधिक मामलों पर सुनवाई हुई, जबकि करीब 1.25 लाख से ज्यादा प्री-लिटिगेशन मामलों का भी समाधान किया गया। इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 1.67 लाख मामलों का निपटारा संभव हो पाया।

मुख्य न्यायाधीश ने किया वर्चुअल उद्घाटन
इस विशेष लोक अदालत का उद्घाटन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेव ने वर्चुअल माध्यम से किया। कार्यक्रम में विवेक अग्रवाल और विवेक जैन भी उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के न्यायाधीश भी ऑनलाइन माध्यम से इस आयोजन में शामिल हुए और अपने-अपने क्षेत्रों में मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया का मार्गदर्शन किया। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पूरे राज्य में बड़ी संख्या में पीठों का गठन किया गया था। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों और तहसीलों में कुल 1388 बेंच बनाई गईं। 

सभी बेंचों ने मिलकर हजारों मामले निपटाए 
इनमें से कुछ बेंच उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के साथ-साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में गठित की गईं, जबकि अधिकांश बेंच जिला और तहसील स्तर की अदालतों में काम कर रही थीं। इन सभी बेंचों ने मिलकर दिनभर में हजारों मामलों को सुलह और समझौते के माध्यम से निपटाया। इस पूरे आयोजन में कई वरिष्ठ विधि अधिकारी, अधिवक्ता और सुलहकर्ता सक्रिय रूप से शामिल रहे। न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ विधि विभाग के प्रतिनिधियों ने भी मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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