भोपाल। मध्य प्रदेश के वन विभाग में इन दिनों वरिष्ठ स्तर पर संभावित प्रशासनिक बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। विभाग के भीतर कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियों की संभावना जताई जा रही है, जिसके कारण वन भवन के गलियारों में गतिविधियां बढ़ गई हैं। हाल ही में 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभरंजन सेन के वन बल प्रमुख बनने के बाद विभागीय ढांचे में कुछ बड़े बदलाव होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि इस बदलाव का असर वन्यजीव, वन विकास निगम और राज्य लघु वनोपज संघ जैसे अहम संस्थानों पर भी पड़ सकता है।
अगले दिनों में प्रमुख पदों पर नई पोस्टिंग संभव
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ प्रमुख पदों पर नई पोस्टिंग का निर्णय लिया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही हैं, हालांकि इस बारे में अब तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि 1989 बैच के आईएफएस अधिकारी एचयू खान, जो वर्तमान में वन विकास निगम में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य लघु वनोपज संघ का प्रबंध संचालक बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है।
विभाष ठाकुर को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
यदि ऐसा निर्णय होता है तो वन विकास निगम में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में 1990 बैच के आईएफएस अधिकारी विभाष कुमार ठाकुर जो अभी पीसीसीएफ (अनुसंधान एवं विस्तार) के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें वन विकास निगम की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसी तरह विभाग में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इस पद के लिए दो नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं, जिनमें बीएस अन्निगिरी और समिता राजौरा शामिल बताए जा रहे हैं।
अन्निगिरी और समिता राजौरा के नाम चर्चा में
विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि वर्तमान में लघु वनोपज संघ में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहीं समिता राजौरा को फिर से वन विभाग की मुख्य जिम्मेदारियों में लाने पर विचार किया जा सकता है। प्रशासनिक सख्ती और निर्णय क्षमता के कारण विभाग में उनकी अलग पहचान मानी जाती है। इसके अलावा हाल ही में पीसीसीएफ पद पर पदोन्नत हुईं अर्चना शुक्ला की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। वर्तमान में वह वन विकास निगम में अपर प्रबंध संचालक के रूप में कार्य कर रही हैं।
सरकार के फैसले पर टिकी सभी की निगाहें
यदि निगम के शीर्ष पद पर बदलाव होता है तो उन्हें विभाग की मुख्यधारा में वापस लाकर अनुसंधान एवं विस्तार से जुड़े दायित्व सौंपे जाने की संभावना भी जताई जा रही है। कुल मिलाकर, वन विभाग में होने वाले संभावित फेरबदल को लेकर अधिकारियों के बीच काफी हलचल देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि इन पदों पर नई नियुक्तियां होती हैं, तो विभाग के प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।










