इंदौर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जो संस्था पूरे प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती कराती है, उसी के अपने कई अहम पद खाली पड़े हैं। लगातार अधिकारियों के रिटायर होने और नई नियुक्तियां समय पर न होने से आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इसका सीधा असर पूरे प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
कई अहम पद खाली, अब तक भर्ती नहीं
बताया जाता है कि एमपीपीएससी में हर वर्ष 4 से 5 अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं, लेकिन उनकी जगह नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। वर्तमान में परीक्षा नियंत्रक के दो पदों में से एक खाली है। अवर सचिव और कार्यालय अधीक्षक जैसे अहम पदों पर भी तीन-तीन रिक्तियां हैं। इससे परीक्षा कार्यक्रम तय करने और उन्हें पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं। यही वजह है कि आयोग इस समय केवल सीमित परीक्षाओं का ही कार्यक्रम जारी कर पा रहा है।
नया इंटरव्यू बोर्ड अब तक गठित नहीं
लोक सेवा आयोग बोर्ड भी पूरी तरह गठित नहीं हैं। ओबीसी और एससी वर्ग से संबंधित बोर्ड रिक्त बताए जा रहे हैं। सामान्य और एसटी वर्ग में सदस्य कार्यरत हैं, लेकिन उनमें से भी एक सदस्य का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है। नए इंटरव्यू बोर्ड के गठन में देरी के कारण अभ्यर्थियों के साक्षात्कार लंबित हैं, जिससे वार्षिक परीक्षा कैलेंडर भी प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति केवल आयोग तक सीमित नहीं है।
समय पर नहीं हो पा रहीं हैं पदोन्नतियां
प्रदेश में कई विभागों में पदोन्नतियां समय पर नहीं हो पा रहीं, जिससे निचले स्तर के अधिकारी ऊपरी पदों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिकारी तेजी से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे प्रशासनिक ढांचा कमजोर पड़ रहा है और कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सूचना है कि प्रदेश के 21 विभागों में लगभग 40 प्रकार के पदों पर 100 से 250 तक भर्तियों का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके बाद आयोग को मांग भेजी जाएगी।
सरकार ने कहा जल्द की जाएगी नियुक्ति
जीएडी एसीएस संजय शुक्ला ने सरकार का कहना है कि सभी विभागों से रिक्त पदों का विवरण मांगा गया है और जल्द ही बोर्ड के शेष सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। यदि समय रहते भर्तियां और पदोन्नतियां नहीं की गईं, तो प्रशासनिक कार्यक्षमता और अधिक प्रभावित हो सकती है। इसलिए रिक्त पदों को भरना और अंतरिम व्यवस्था करना अब अपरिहार्य हो गया है, ताकि विभागों का काम सुचारु रूप से जारी रहे।










