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मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज 16 फरवरी से शुरू हो रहा है। 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। स्वास्थ्य, कृषि, युवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास फोकस रहने वाला है। यह मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट होगा। जानिए इस बार के वार्षिक बजट में क्या रहने वाला है खास।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र की शुरुआत आज सोमवार 16 फरवरी को राष्ट्रगीत वंदेमारत के साथ होगी। इसके बाद राज्यपाल मंगू भाई पटेल का अभिभाषण होगा, जिसमें वह प्रदेश सरकार की नीतियों, आगामी योजनाओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं का विस्तार से विवरण देंगे। बजट सत्र में राज्य की वित्तीय नीतियों, योजनाओं और खर्चों पर विस्तार से चर्चा होगी। इस दौरान राज्य सरकार जहां अपनी नीतियों और फैसलों का बचाव करती दिखाई देगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार सवालों के घेरे में है। इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। यह घटना सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और जनस्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 

मोहन सरकार का तीसरा होगा यह बजट
इस बजट सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करेगा। इसके अलावा, बजट सत्र में सूबे के खजाने पर बढ़ते कर्ज के बोझ पर भी विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। 18 फरवरी को प्रदेश वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगे। 18 को पेश होने वाला बजट डॉ. मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट होगा। इसलिए इसे राजनीतिक और विकासात्मक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। चूंकि अगले वर्ष पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं, इस लिए बजट में आम जनता से जुड़े मुद्दों और कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष फोकस देखने को मिल सकता है।

आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होगा बजट
सूत्रों के मुताबिक, यह बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक विकास की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। राज्य सरकार इस बार के बजट से पूंजीगत खर्च बढ़ाने, आधारभूत संरचना को मजबूत करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर देती दिखाई देगी। प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने हाल के सालों में लगभग 10 फीसदी की औसत वृद्धि दर्ज की है, जिसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी वित्त वर्ष का कुल बजट आकार 4.65 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है।

सीएम केयर योजना की शुरुआत संभव
इस बार सरकार का ध्यान स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, युवाओं और विकास परियोजनाओं पर केंद्रित रहने की संभावना है। लगभग 1.40 करोड़ स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत टेट्रा पैक दूध उपलब्ध कराने की घोषणा हो सकती है, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना भी बजट में शामिल की जा सकती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सीएम केयर जैसी नई पहल की संभावना है, जिसके माध्यम से प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। 

बजट में स्वास्थ्य, कषि, युवाओं पर फोकस
बजट में एक अत्याधुनिक स्टेट कार्डियक सेंटर और अंग प्रत्यारोपण संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव किया जा सकता है, जहां लिवर, किडनी, हृदय, फेफड़े और कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर के मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हृदय रोग उपचार से जुड़े विशेष विभाग शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना पर अगले 5 सालों में 2,000 करोड़ खर्च करने का अनुमान है। इसके साथ ही सीहोर (बुधनी), दमोह और छतरपुर में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए भी बजट में प्रावधान किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह बजट विकास और जनकल्याण के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता दिखाई दे सकता है।

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