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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लिए जाने के बाद खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता लोकस स्टैंडी साबित नहीं कर सके। वहीं पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

 जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मामला जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आया, जहां याचिकाकर्ता अपनी याचिका को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कानूनी अधिकार यानी लोकस स्टैंडी सिद्ध नहीं कर सके। लंबी बहस के बाद उन्होंने स्वयं याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

कांग्रेस पदाधिकारी ने दायर की थी यह याचिका
यह याचिका कांग्रेस से जुड़े एक पदाधिकारी प्रदीप अहिरवार की ओर से दायर की गई थी। उनका आरोप था कि मंत्री के नाम पर जारी जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध है। याचिका में यह तर्क दिया गया कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बागरी जाति की सामाजिक स्थिति भिन्न है।

महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड में इसे राजपूत समुदाय से जोड़ा जाता है, जबकि निमाड़ और मालवा क्षेत्र में इसे अनुसूचित जाति की श्रेणी में माना जाता है। 

याचिका की वैधता पर महाधिवक्ता ने उठाया सवाल
इसी आधार पर यह सवाल उठाया गया था कि क्या प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव सही पात्रता के साथ लड़ा था। याचिकाकर्ता ने पहले राज्य स्तरीय जाति प्रमाण पत्र परीक्षण प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

उनका दावा था कि दो माह बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने याचिका की वैधता पर आपत्ति जताई। 

पेड़ों से जुड़े मामले में 18 मार्च को होगी सुनवाई
अदालत ने पूछा कि याचिकाकर्ता इस मामले से सीधे तौर पर कैसे प्रभावित हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर याचिका वापस ले ली गई। इसी दिन प्रदेश में पेड़ों की कटाई से जुड़े एक अन्य मामले में भी सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने बताया कि यह विषय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी सूचीबद्ध है।

चूंकि मामला वहां विचाराधीन है, इसलिए फिलहाल कोई आदेश पारित किए बिना अगली सुनवाई 18 मार्च तय की गई है। इस तरह दोनों मामलों में फिलहाल अंतरिम राहत की स्थिति बनी हुई है।

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