ग्वालियर। एक सेवानिवृत्त एयरफोर्स अधिकारी साइबर ठगी का शिकार हो गए। वायुसेना में वारंट ऑफिसर रहे चुके हैं, से ठगों ने करीब 9.87 लाख रुपए हड़प लिए। जालसाज ने खुद को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुख्य शाखा का अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया और भरोसे में लेकर बैंक खाते की जानकारी हासिल कर ली। घटना 30 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। यह घटना देर में सामने आई, क्योंकि उनका मोबाइल चोरी हो गया था। जब वह बैंक शाखा पहुंचे तब उन्हें इस फ्रॉड का पता चला।
एसबीआई का अफसर बनकर किया फोन
उन्होंने बताया एक दिन वह मोबाइल देख रहे थे, तभी एक कॉल आया।फोन करने वाले ने कहा उसे उनका लाइफ सर्टिफिकेट तैयार कराने की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई है। पेंशनधारकों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जरूरी होता है, इसलिए उन्होंने कॉलर की बात पर भरोसा कर लिया। आरोपी ने उन्हें योनो ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। शुक्ल को संदेह हुआ तो कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल औपचारिकता है।
तीन बार में ठग ने खाते निकाले रुपए
धीरे-धीरे बातचीत के दौरान उसने उनका पिन और अन्य जरूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद आरोपी ने चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 9 लाख 87 हजार रुपए खाते से निकाल लिए। पैसे कटने की जानकारी उन्हें तुरंत नहीं मिल सकी। मामले को और उलझा देने वाली बात यह रही कि ठगी के कुछ ही दिन बाद, 1 जनवरी 2026 को उनका मोबाइल फोन भी चोरी हो गया। जब वे बैंक पहुंचे और खाते की जानकारी ली, तब उन्हें पूरे फ्रॉड का पता चला।
अनजान कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें
इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई और मामला गोला का मंदिर थाना पुलिस को भेजा गया। अब इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है और ट्रांजेक्शन से जुड़े विवरण जुटाए जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर बताती है कि साइबर ठग किस तरह वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना और किसी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना बेहद जरूरी है।










