भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा संगठन ने अपने प्रदेश मुख्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए हैं। यह निर्णय संगठन को अधिक व्यवस्थित और परिणामकारी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस संबंध में सभी जिला अध्यक्षों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब आम नागरिक सीधे आवेदन नहीं दे सकेंगे। उन्हें किसी जनप्रतिनिधि या पार्टी पदाधिकारी की अनुशंसा के साथ ही आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस कदम को जनसुनवाई प्रक्रिया में अनुशासन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिफारिश बिना स्वीकार नहीं होंगे आवेदन
नई गाइडलाइन के अनुसार, अब आवेदन के साथ किसी विधायक, सांसद, जिलाध्यक्ष या अधिकृत पदाधिकारी की सिफारिश अनिवार्य कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल जरूरी और गंभीर मामलों को ही आगे बढ़ाया जाए। पार्टी का मानना है कि इससे फालतू या कम प्राथमिकता वाले मामलों की संख्या घटेगी। साथ ही, असली जरूरतमंद लोगों की समस्याओं पर जल्दी ध्यान दिया जा सकेगा। इस व्यवस्था से जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनसुनवाई का समय भी बदला गया
सिर्फ प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि जनसुनवाई के समय में भी बदलाव किया गया है। पहले यह कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक चलता था। अब इसे सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित किया जाएगा। समय में यह बदलाव लोगों की सुविधा और बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखकर किया गया है। इससे अधिक लोग समय पर पहुंचकर अपनी समस्याएं रख सकेंगे।
अप्रैल माह का शेड्यूल भी जारी
प्रदेश अध्यक्ष ने अप्रैल महीने के लिए जनसुनवाई का पूरा कार्यक्रम तय कर दिया है। 1 से 3 अप्रैल के बीच विभिन्न मंत्री और पदाधिकारी मुख्यालय में मौजूद रहेंगे। इनमें विश्वास सारंग, कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। वे निर्धारित समय पर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और समाधान का प्रयास करेंगे। इस दौरान आम जनता को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
4 से 6 अप्रैल के बीच नहीं होगी सुनवाई
4 से 6 अप्रैल के बीच पार्टी के स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस कारण इन दिनों नियमित जनसुनवाई नहीं होगी। इसके बाद 7 से 10 अप्रैल तक फिर से जनसुनवाई शुरू की जाएगी। इस चरण में राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार और अन्य नेता उपस्थित रहेंगे। वे कार्यालय में बैठकर लोगों की शिकायतों पर सुनवाई करेंगे।
व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश
कुल मिलाकर, यह बदलाव भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली को प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे जनसुनवाई में अनावश्यक भीड़ कम होगी। जबकि, गंभीर मामलों को प्राथमिकता मिलने से समाधान प्रक्रिया तेज होगी। हालांकि, सिफारिश अनिवार्य होने से कुछ लोगों को असुविधा भी हो सकती है। अब यह देखना होगा कि यह नई व्यवस्था जमीन पर कितनी सफल होती है।









