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भोपाल में एचएफए योजना के तहत फ्लैट खरीदने वालों पर अतिरिक्त ₹5.3 लाख का बोझ। कब्जे में देरी के कारण रजिस्ट्रेशन शुल्क बढ़ा, खरीदारों ने जताई नाराजगी। अधिक जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

भोपाल। हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए) योजना के तहत फ्लैट खरीदने वाले लोगों को अब भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। करीब 100 से अधिक खरीदारों को रजिस्ट्रेशन के समय अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही है। इन लोगों ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच एलआईजी (लो-इनकम ग्रुप) फ्लैट खरीदे थे। प्रत्येक फ्लैट की कीमत लगभग 22 लाख रुपए रखी गई थी। तब नगर निगम ने 2023 तक फ्लैट का कब्जा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन निर्माण और प्रक्रिया में देरी के चलते कब्जा करीब 5 साल बाद मिलना शुरू हुआ। इस देरी ने अब खरीदारों की आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है।

रजिस्ट्रेशन शुल्क में बड़ा इजाफा 
जब खरीदार रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे तो उन्हें नई समस्या का सामना करना पड़ा। अप्रैल 2026 की नई कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार संपत्ति का मूल्य बढ़ाकर 42 लाख रुपये माना गया। यानी पहले 22 लाख के फ्लैट अब रजिस्ट्रेशन के लिए 42 लाख के हिसाब से गिने जा रहे हैं। इस बदलाव के कारण हर खरीदार पर लगभग 5.30 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ आ गया है। खरीदारों का कहना है कि यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है क्योंकि देरी उनकी गलती नहीं थी। अगर समय पर कब्जा मिलता तो उन्हें पुरानी दरों पर रजिस्ट्रेशन का लाभ मिल जाता। अब अचानक बढ़े खर्च ने उनकी वित्तीय योजना बिगाड़ दी है।

अन्य परियोजनाओं में भी वही हाल 
यह समस्या केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। बाग मुगालिया और राहुल नगर की परियोजनाओं में भी लगभग 5 साल की देरी हुई है। इन परियोजनाओं के खरीदार भी इसी तरह की परेशानी झेल रहे हैं। अधिकांश लोगों ने बैंक से लोन लेकर फ्लैट खरीदे थे। उन्हें लंबे समय तक बिना कब्जा मिले ईएमआई भरनी पड़ी। अब रजिस्ट्रेशन के समय अतिरिक्त राशि ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें पहले 2023 की दरों पर शुल्क लेने का भरोसा दिया गया था।

बाजार मूल्य और गाइडलाइन में अंतर 
खरीदारों का दावा है कि इन फ्लैट्स की वर्तमान बाजार कीमत करीब 30 लाख रुपये है। इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन के लिए 42 लाख का मूल्य तय किया जा रहा है। इस अंतर को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यह मूल्य वास्तविकता से काफी ज्यादा है। जिसके कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम मान रहे हैं। और इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

प्रदर्शन और राहत की मांग 
परेशान खरीदारों ने इस मुद्दे को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने कलेक्टर और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें पहुंचाई हैं। हाल ही में वे नगर निगम मुख्यालय भी पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। अतिरिक्त कमिश्नर ने उन्हें कलेक्टर से इस मुद्दे पर बात करने की सलाह दी है। बुधवार को कलेक्टर के साथ बैठक प्रस्तावित है। खरीदारों को उम्मीद है कि उन्हें इस अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी। वे चाहते हैं कि देरी का खामियाजा उन्हें न भुगतना पड़े।

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