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सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग ट्रायल नियमों की खामियों पर रिपोर्ट मांगी। भोपाल-इंदौर में मौतों और अनैतिक ट्रायल के आरोपों ने बढ़ाई चिंता, जानें पूरा मामला।

 भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने देश में दवा परीक्षण (ड्रग ट्रायल) से जुड़े नियमों में खामियों को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से इन कमियों पर एक समग्र रिपोर्ट पेश करने को कहा। यह मामला 2012 में दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) से जुड़ा है, जिसे स्वास्थ अधिकार मंच (एसएएम) नामक संगठन ने दाखिल किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों द्वारा देशभर में बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल किए गए। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है।

क्लीनिकल ट्रायल की कमियों पर उठे सवाल  
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कोर्ट में दलील रखी। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल में शामिल किए जाने वाले लोगों के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट और व्यवस्थित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे नए ड्रग्स और क्लिनिकल ट्रायल नियमों को चुनौती नहीं दे रहे हैं। बल्कि उनका उद्देश्य उन कमियों की ओर ध्यान दिलाना है, जिन्हें सुधारने की जरूरत है। उनका कहना है कि मौजूदा नियमों में कई ऐसे पहलू हैं, जहां स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव है। इसी कारण ट्रायल में शामिल लोगों की सुरक्षा और अधिकारों पर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने इन्हीं बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

भोपाल और इंदौर में मौतों का मुद्दा भी उठा 
स्वास्थ अधिकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक अमूल्य निधि ने गंभीर आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि ड्रग ट्रायल के दौरान भोपाल में 22 और इंदौर में 33 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि केंद्र सरकार ने ट्रायल के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन उनमें कई खामियां मौजूद हैं। इन्हीं कमियों के कारण ऐसे गंभीर परिणाम सामने आए हैं। निधि ने कहा कि कोर्ट ने अब इन खामियों की एक संयुक्त रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट भविष्य में नियमों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।
इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

ईओडब्ल्यू रिपोर्ट में अनैतिक ट्रायल का खुलासा 
अमूल्य निधि ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की रिपोर्ट का भी जिक्र किया। इस रिपोर्ट में राज्य में अनैतिक मानव दवा परीक्षणों का खुलासा किया गया था। ईओडब्ल्यू के अनुसार, डॉक्टरों ने 3,307 लोगों पर 76 क्लिनिकल ट्रायल किए। इन ट्रायल के जरिए उन्होंने करीब 5.10 करोड़ रुपए कमाए। ये ट्रायल इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और एमवाय अस्पताल में किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि इन परीक्षणों में मासूम और अनजान लोगों को शामिल किया गया। यह खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था में नैतिकता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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