जस्टिस विशाल मिश्रा से संपर्क की कोशिश करने के मामले में भाजपा एमएलए संजय पाठक हाई कोर्ट में पेश हुए। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। संजय पाठक द्वारा अगली सुनवाई में अदालत में पेश होने को लेकर छूट मांगी गई थी। इसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है। सुनवाई की अगली तारीख 14 मई तय की गई है।
अदालत ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को कोर्ट की सहायता करने की अनुमति दे दी है। उनके सीनियर एडवोकेट द्वारा इंटरवेंशन एप्लिकेशन मूव की गई थी। उनका कहना था कि, वे याचिकाकर्ता हैं इसलिए उन्हें भी सुना जा चाहिए। कोर्ट ने उन्हें अनुमति तो दे दी लेकिन कहा कि, औपचारिक रूप से इंटरवेंशन एप्लिकेशन दायर न करें। इस तरह आशुतोष दीक्षित मौखिक रूप से इस मामले में कोर्ट की मदद करेंगे।
जानिए पूरा मामला
हाई कोर्ट द्वारा कटनी के रहने वाले आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लिया गया था। दीक्षित ने याचिका में आरोप लगाया था कि, विधायक संजय पाठक ने जस्टिस विशाल मिश्रा से सम्पर्क करने की कोशिश की थी। जस्टिस विशाल मिश्रा पाठक के परिवार से जुड़ी खदान के मामले में सुनवाई कर रहे थे।
सितंबर 2025 में जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि, विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की। मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद मामले को मुख्य न्यायधीश के समक्ष भेजा गया।
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कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के समक्ष ये मामला उठाया है। विधायक संजय पाठक की ओर से अदातल में आपत्ति उठाई गई लेकिन सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
गलती से दयाल हुआ था नंबर
पाठक ने नोटिस के जवाब में कहा था कि, 'उनसे गलती से जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर दयाल हो गया था। उन्होंने एक रिंग के बाद ही कॉल कट कर दिया था।' पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि, व्यक्तिगत रूप से पेश होने पर ही हलफनामे पर विचार किया जाएगा।










