haribhoomi hindi news
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर PM मोदी ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। 26 लोगों की मौत वाले इस हमले को बताया देश की आत्मा पर गहरा घाव, आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश- पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया, लेकिन उस दिन की भयावह यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि देश की आत्मा पर लगा ऐसा घाव है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज भी उस दिन की तस्वीरें और कहानियां लोगों को अंदर तक झकझोर देती हैं।

PM मोदी का संदेश: आतंक के आगे कभी नहीं झुकेगा भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा-
“पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूँ। उन्हें कभी नहीं भुलाया जाएगा। इस अपूरणीय क्षति से जूझ रहे परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
एक राष्ट्र के रूप में हम शोक और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी नहीं झुकेगा। आतंकियों के नापाक मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।”
pm modi on pahalgam

धर्म पूछकर बनाए गए निशाने
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ यह हमला इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। आतंकियों ने लोगों की पहचान उनके धर्म के आधार पर की और गोली चलाने से पहले उन्हें जबरन इस्लामी आयतें पढ़ने के लिए मजबूर किया।

26 जिंदगियां, अनगिनत टूटे सपने
इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू चालक शामिल था। वह टट्टू चालक पर्यटकों को बचाने की कोशिश करते हुए खुद शहीद हो गया। कई नवविवाहित जोड़े भी इस हमले का शिकार बने और कई लोगों को उनके परिवार के सामने बेहद करीब से गोली मारी गई।

खामोश घाटी, दहशत में डूबा पहलगाम
हमले के बाद पूरा इलाका दहशत में डूब गया था। पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर पहलगाम की रौनक अचानक सन्नाटे में बदल गई। इस घटना ने देशभर में गुस्सा और शोक की लहर पैदा कर दी थी।

TRF और लश्कर कनेक्शन
इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली थी, जिसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है। यह हमला हाल के वर्षों में नागरिकों को निशाना बनाने वाली सबसे क्रूर घटनाओं में शामिल रहा। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह हमला सुनियोजित था और इसके तार सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े थे।

भारत का जवाब: ऑपरेशन सिंदूर
हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकियों के कई बड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सटीक, संयमित और निर्णायक कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन पूरी तरह लक्षित और संतुलित था। इसका मकसद तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना था। इस कार्रवाई ने साफ संदेश दिया कि भारत अब हर हमले का जवाब उसी भाषा में देगा।

आज भी जिंदा है वह दर्द, कायम है संकल्प
पहलगाम की वह घटना आज भी देश की यादों में जिंदा है। यह सिर्फ एक बरसी नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है।

7