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भोपाल में सहारा लैंड घोटाले की जांच उस समय धीमी पड़ गई जब मुख्य आरोपी ओपी श्रीवास्तव को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार कर लिया गया। ईओडब्ल्यू को जांच आगे बढ़ाने के लिए उनके बयान का इंतजार है। 1000 करोड़ की जमीन को कम कीमत पर बेचने और रकम जमा न करने के आरोपों के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है।

भोपाल। सहारा लैंड स्कैम की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में एक अहम आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड के डिप्टी मैनेजर ओपी श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। वर्तमान में वह कोलकाता की जेल में बंद हैं, जिससे मध्यप्रदेश में चल रही जांच प्रभावित हो रही है। जांच एजेंसी को आगे बढ़ने के लिए उनके बयान की जरूरत है। बयान के बिना कई अहम पहलुओं की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण यह मामला फिलहाल ठहराव की स्थिति में पहुंच गया है।

1000 करोड़ की जमीन में अनियमितताएं  
ईओडब्ल्यू ने करीब 8 माह पहले इस घोटाले में केस दर्ज किया था। मामला सहारा समूह की जमीन से जुड़े बड़े आर्थिक अनियमितताओं का है। एफआईआर 25 जुलाई 2025 को दर्ज की गई थी। इसमें भोपाल, कटनी और जबलपुर की कीमती जमीनों की बिक्री पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि लगभग 1000 करोड़ रुपए की जमीन मात्र 98 करोड़ में बेच दी गई। इतना ही नहीं, इस बिक्री से प्राप्त राशि को नियमानुसार जमा भी नहीं किया गया। बताया गया कि यह पैसा सहारा-सेबी के संयुक्त खाते में जाना था, लेकिन जमा नहीं हुआ। 

किन अधिकारियों पर लगे हैं आरोप
इस मामले में ओपी श्रीवास्तव की भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। वह उस समय सहारा लैंड डिवीजन के प्रमुख थे। उनके साथ सीमांतो रॉय और जेबी रॉय को भी आरोपी बनाया गया है। सीमांतो रॉय कॉर्पोरेट कंट्रोल मैनेजमेंट के प्रमुख थे। जबकि जेबी रॉय समूह में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। ईओडब्ल्यू का दावा है कि इन तीनों ने मिलकर इस घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाई। एफआईआर में इनके खिलाफ सीधे तौर पर संलिप्तता के आरोप दर्ज किए गए हैं।

जांच आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है बयान
जांच अधिकारियों के अनुसार, ओपी श्रीवास्तव का बयान इस केस में बेहद महत्वपूर्ण है। उनसे पूछताछ के बिना कई तथ्यों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसी वजह से एजेंसी अब कोलकाता जाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अदालत से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अनुमति मिलने के बाद ईओडब्ल्यू टीम जेल में जाकर उनका बयान दर्ज करेगी। इस कार्रवाई से जांच को फिर से गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एजेंसी इस मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रही है।

निवेशकों की बढ़ी चिंता, ट्रांजिट रिमांड की मांग
इस पूरे मामले से जुड़े निवेशकों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी को भोपाल लाया जाए। निवेशकों का कहना है कि ट्रांजिट रिमांड पर लाकर पूछताछ की जानी चाहिए। ताकि उनके पैसे से जुड़े मामलों का जल्द समाधान हो सके। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण वे परेशान हैं। वे चाहते हैं कि जांच तेज हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। मामले में अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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